मलिकतुल अरब हज़रत ख़दीजतुल-कुबरा स.अ.की हयात ए तैय्यबा तिजारत, ईसार और इस्लामी ख़िदमात का रौशन बाब है।ख़दीजा बिन्त ख़ुवैलिद ने मक्का के अज़ीम तिजारती माहौल में दियानत, बसीरत और मुनज़्ज़म कारोबारी निज़ाम के ज़रिये ग़ैर-मामूली मक़ाम हासिल किया। आप स.अ.अपनी सच्चाई, अमानतदारी और बुलंद अख़लाक़ की वजह से तमाम ताजिरों में मुम्ताज़ थीं।
,मलिकतुल अरब हज़रत ख़दीजतुल-कुबरा स.अ.की हयात ए तैय्यबा तिजारत, ईसार और इस्लामी ख़िदमात का रौशन बाब है।ख़दीजा बिन्त ख़ुवैलिद ने मक्का के अज़ीम तिजारती माहौल में दियानत, बसीरत और मुनज़्ज़म कारोबारी निज़ाम के ज़रिये ग़ैर-मामूली मक़ाम हासिल किया। आप स.अ.अपनी सच्चाई, अमानतदारी और बुलंद अख़लाक़ की वजह से तमाम ताजिरों में मुम्ताज़ थीं।
व्यापार की शुरुआत और प्राचीन इतिहास
व्यापार मानवीय सभ्यता की शुरुआत से ही मौजूद है। जब इंसान ने कृषि जीवन अपनाया, तो वस्तु-विनिमय शुरू हुआ। चीन, ईरान, मिस्र और रोम में 3000 ईसा पूर्व से व्यापार के प्रमाण मिलते हैं। सिक्कों का चलन लगभग 7वीं सदी ईसा पूर्व में लीडिया (Lydia) में हुआ। (संदर्भ हेरोडोटस۔ द हिस्ट्रीज़)
मक्का एक महान व्यापारिक केंद्र
हज़रत ख़दीजा (S.A) से पहले भी मक्का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था। क़ुरैश के क़ाफ़िले यमन और शाम (सीरिया) तक जाते थे। अरब लोग रोमन और फारसी साम्राज्यों के बीच एक व्यापारिक सेतु का काम करते थे, जिसका ज़िक्र कुरान की सूरह क़ुरैश में भी है।
हज़रत ख़दीजा (S.A) की व्यापारिक हैसियत
इस्लाम से पहले आप मक्का की सबसे बड़ी और सम्मानित व्यापारी थीं। आपका निवेश शाम और यमन तक फैला था।
आपकी व्यापारिक विशेषताएँ۔
1 विशाल पूँजी, जो पूरे क़ुरैश के बराबर थी।
2 अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क।
3 'मुज़ारबत' (मुनाफ़े में साझेदारी) का व्यवस्थित तंत्र।
4 ईमानदारी और अच्छे व्यवहार की प्रसिद्धि।
संदर्भ अल-इसाबा, इब्न हजर मक्की
रसूलुल्लाह (S.A.W) की सच्चाई और बरकत
एक बार आपने पैगंबर मुहम्मद (S.A.W) को अपने माल के साथ व्यापार पर भेजा। आपकी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से इतना लाभ हुआ कि आपकी ख्याति पूरे अरब में फैल गई। (संदर्भ: तारीख़-ए-तबरी, खंड 2)
इस्लाम की आर्थिक नींव और त्याग
आपने अपनी सारी दौलत इस्लाम के प्रचार और मुसलमानों की ज़रूरतों के लिए वक़्फ़ (दान) कर दी। रसूलुल्लाह (S.A.W) ने फ़रमाया: "ख़दीजा ने उस समय मेरा साथ दिया जब दुनिया ने मुझे छोड़ दिया था, और अपना माल मुझ पर न्योछावर कर दिया।" (संदर्भ: मुस्तदरक अल-हाकिम)
शेब-ए-अबी तालिब और आम-उल-हुज़न
आपने 3 साल तक शेब-ए-अबी तालिब की घेराबंदी में कड़े कष्ट सहे, यहाँ तक कि भूख के कारण पत्ते तक खाने पड़े। इससे आप बहुत कमज़ोर हो गईं और 10 रमज़ान को आपका इंतकाल हो गया। उसी वर्ष हज़रत अबू तालिब (A.S) का भी निधन हुआ, जिसे रसूलुल्लाह (S.A.W) ने 'आम-उल-हुज़न' (शोक का वर्ष) घोषित किया।
पवित्र दरगाह आपकी पवित्र क़ब्र मक्का की सरज़मीन 'जन्नतुल मुअल्ला' (अल-हजून) में स्थित है, जो क़यामत तक मुसलमानों के लिए ज़ियारतगाह है।
निष्कर्ष आज के पुरुषों और महिलाओं को शहज़ादी के जीवन से सबक लेकर व्यापार में उन्नति करनी चाहिए ताकि वे दूसरों की मदद के काबिल बन सकें। हमें समाज के ताने या मज़ाक की परवाह नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह ने मुनाफ़े के 9 हिस्से व्यापार में रखे हैं।













