एकता» इस्लामी उम्मत की गरिमा और शक्ति का रहस्य है।हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन नूरअली दयलम

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एकता» इस्लामी उम्मत की गरिमा और शक्ति का रहस्य है।हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन नूरअली दयलम

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन नूरअली दयलम ने कहां सप्ताह-ए-वहदत की बधाई दी और विभिन्न इस्लामी संप्रदायों के अनुयायियों के बीच एकता और भाईचारे के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि ईरान के मुस्लिम लोग विभिन्न जातीय और धार्मिक पृष्ठभूमियों के बावजूद धैर्य, दृढ़ता, त्याग और सत्य की रक्षा के क्षेत्र में शानदार मिसाल पेश करते रहे हैं। यह उनकी जागरूकता और सत्य के मोर्चे के साथ उनके समर्थन को दर्शाता है।

उन्होंने पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स.ल.) के स्थान का उल्लेख करते हुए कहा कि वे पूरी मानवता के लिए सबसे पूर्ण आदर्श हैं।

अल्लाह ने हज़रत मुहम्मद मुस्तफा (स.ल.) को एक अद्वितीय आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया। वे “रहमतुल्लिल आलमीन” थे और व्यक्तिगत तथा सामाजिक जीवन के सभी क्षेत्रों में, चाहे मुसलमान हों या गैर-मुसलमान, गरीब हों या अमीर, नैतिकता और मानवीय सम्मान को अपनी जीवन-पद्धति का आधार बनाया।

उन्होने पैगंबर (स.ल.) के आचरण को याद करते हुए कहा कि जिस पैगंबर को सताया गया और जिन्हें अपना शहर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, उन्होंने सत्ता प्राप्त करने के बाद भी रहमत और क्षमा का रास्ता अपनाया। यही पैगंबरी नैतिकता और न्याय का महान पाठ है, जिसकी आज के समाज को पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है।

हुज्जतुल इस्लाम दयलम ने दुनिया के मज़लूमों के प्रति मुसलमानों की धार्मिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि इस्लामी क्रांति पैगंबर-ए-इस्लाम (स) की शिक्षाओं के आधार पर हमेशा दुनिया के मज़लूमों के साथ खड़ी रही है। इसलिए वंचितों के समर्थन और साम्राज्यवादी ताकतों का मुकाबला करने के लिए जनता की सक्रिय भागीदारी, पैगंबरी जीवन-पद्धति पर अमल का स्पष्ट उदाहरण है।

उन्होंने अपने भाषण के एक अन्य हिस्से में इमाम ख़ुमैनी (रह.) की पहल पर सप्ताह-ए-वहदत के नामकरण के उद्देश्य का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस्लाम, कुरआन, पैगंबर-ए-अकरम (स) और एक क़िबला ऐसे बुनियादी साझा आधार हैं, जो विभिन्न इस्लामी संप्रदायों के बीच अधिकतम भाईचारे और एकजुटता का वातावरण तैयार कर सकता हैं।

गुलस्तान इस्लामिक सेंटर के प्रमुख ने इस्लामी क्रांति के शहीद नेता द्वारा विभिन्न धार्मिक समुदायों के पवित्र प्रतीकों के सम्मान और हर प्रकार की फूट से मुकाबला करने पर लगातार दिए गए जोर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दृष्टिकोण इस्लामी व्यवस्था की एकता के मुद्दे पर गहरी और रणनीतिक सोच को दर्शाता है।

अंत में हुज्जतुल इस्लाम दयलम ने लोगों की व्यावहारिक एकता की प्रशंसा करते हुए कहा कि दुश्मन शिया और सुन्नी के बीच दूरी और विभाजन पैदा करने के लिए भारी संसाधन खर्च कर रहे हैं। लेकिन आज विभिन्न उलेमा, अधिकारियों और जातीय समुदायों का एक साथ एकत्र होना दुश्मनों की बातों का करारा जवाब और इस बात का प्रमाण है कि इस्लामी एकता आज भी जीवित और प्रभावशाली है।

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