हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन खलीलपुर: हज़रत पैग़म्बरे अकरम स.ल.व.पूरी दुनिया के लिए रहमत के प्रतीक हैं

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हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन खलीलपुर: हज़रत पैग़म्बरे अकरम स.ल.व.पूरी दुनिया के लिए रहमत के प्रतीक हैं

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अली खलीलपुर ने कहा कि पैग़म्बरे अकरम स.ल.व.अल्लाह की रहमत के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि अल्लाह कुरआन में फ़रमाता है और हमने आपको तमाम संसारों के लिए रहमत बनाकर ही भेजा है।हज़रत पैग़म्बर (स) पूरी मानवता के लिए रहमत बनकर भेजे गए और जो लोग उन्हें तकलीफ़ पहुँचाते थे, उनके साथ भी रहम और क्षमा का व्यवहार करते थे।

उन्होंने मंगलवार को हज़रत फ़ातिमा मासूमा (स.) के पवित्र हरम के इमाम ख़ुमैनी सहन में आयोजित तफ़्सीर कार्यक्रम में पैग़म्बरे अकरम (स) के जन्मदिवस के अवसर पर सूरह अश-शरह की आयतों की व्याख्या करते हुए पैग़म्बर स.ल.व. की विशेषताओं और उनकी सीरत में शरहे-सद्र यानी दिल की विशालता और मानसिक क्षमता के महत्व को बयान किया। उन्होंने इस सूरह से सब्र, कठिनाइयों को सहन करने और मौत के लिए तैयार रहने को मोमिनों के लिए महत्वपूर्ण सबक बताया।

उन्होंने कहा कि हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स.ल.) मानव इतिहास के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों में से एक हैं। उनकी विशेषताओं, गुणों और सीरत के बारे में अनेक पुस्तकें लिखी गई हैं।

उन्होंने आगे कहा कि कुरआन में भी पैग़म्बरे अकरम (स.ल.व.) की अनेक विशेषताओं का उल्लेख हुआ है। सूरह अशरह में अल्लाह शुरुआत में फ़रमाता है:क्या हमने तुम्हारे लिए तुम्हारा सीना नहीं खोल दिया? इसमें पैग़म्बर (स) के विशाल हृदय और मानसिक विस्तार की ओर संकेत किया गया है।

पैग़म्बर (स.ल.) ने कठिनाइयों के बावजूद सब्र किया:

धार्मिक विशेषज्ञ ने पैग़म्बरे अकरम (स.ल.) को दीन की तब्लीग़ के रास्ते में पेश आने वाली कठिनाइयों और दुश्मनों की यातनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य समस्याओं के साथ-साथ दुश्मनों की अनेक यातनाएँ भी उनकी रिसालत के दौर की कठिनाइयों का हिस्सा थीं। लेकिन पैग़म्बर (स.ल.) ने इन सभी परिस्थितियों में सब्र और धैर्य से काम लिया और यहाँ तक कि अपने दुश्मनों के लिए भी दुआ करते थे।

पैग़म्बरे अकरम (स.ल.) पूरी दुनिया के लिए रहमत हैं:

हुज्जतुल इस्लाम खलीलपुर ने कहा कि पैग़म्बरे अकरम (स.ल.व.) अल्लाह की रहमत के प्रतीक थे। कुरआन में अल्लाह फ़रमाता है:और हमने आपको तमाम संसारों के लिए रहमत बनाकर ही भेजा है।

उन्होंने कहा कि पैग़म्बर (स.ल.) पूरी दुनिया के लिए रहमत बनकर भेजे गए और जो लोग उन्हें तकलीफ़ देते थे, उनके साथ भी रहम और क्षमा का व्यवहार करते थे।

उन्होंने आगे सूरह अश-शरह की आयत “और हमने तुमसे तुम्हारा भारी बोझ उतार दिया का उल्लेख करते हुए कहा कि “विज़्र” का अर्थ भारी बोझ है। इससे पता चलता है कि पैग़म्बरे अकरम (स.ल.व.) ने रिसालत की भारी जिम्मेदारी और अनेक कठिनाइयों का बोझ अपने कंधों पर उठाया।

उन्होंने कहा कि इंसान को जीवन में विभिन्न प्रकार की परेशानियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए उसे इन समस्याओं का सामना करने के लिए अपनी क्षमता और सहनशक्ति बढ़ानी चाहिए। अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ.) ने भी इंसान के दिलों के बारे में फ़रमाया है कि सबसे अच्छा दिल वह है जिसमें सहन करने की क्षमता सबसे अधिक हो।

पैग़म्बर (स.ल.व.) का सब्र उनके नाम की बुलंदी का कारण बना:

हौज़ा ए इल्मिया के शिक्षक ने आयत “और हमने तुम्हारे लिए तुम्हारे ज़िक्र को बुलंद कर दिया का उल्लेख करते हुए कहा कि अल्लाह ने पैग़म्बर (स) की कठिनाइयों और रिसालत के भारी बोझ का उल्लेख करने के बाद उनके नाम की बुलंदी का ज़िक्र किया है, क्योंकि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में सब्र और दृढ़ता का प्रदर्शन किया।

उन्होंने कहा कि इस्लाम के दुश्मनों ने पूरे इतिहास में पैग़म्बरे अकरम (स.ल.) के नाम और संदेश को मिटाने की बहुत कोशिशें कीं, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। क्योंकि जिस नाम को अल्लाह ने बुलंद किया हो, उसे दुश्मनों की कोशिशों से मिटाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि दुनिया परीक्षा और कठिनाइयों का स्थान है। इंसान को समझना चाहिए कि सांसारिक जीवन समस्याओं और परेशानियों से जुड़ा हुआ है। इसलिए पहली ही कठिनाई में अपनी सहनशक्ति नहीं खोनी चाहिए और न ही जीवन को अपने लिए कठिन बना लेना चाहिए।

मौत की तैयारी, शरहे-सद्र की निशानी

उन्होंने आगे पैग़म्बरे अकरम (स.ल.व.) की एक रिवायत का उल्लेख करते हुए कहा कि शरहे-सद्र की निशानियों में से एक मौत से पहले मौत के लिए तैयार रहना है। इंसान को जीवन का अवसर समाप्त होने से पहले ही अल्लाह से मुलाकात के लिए स्वयं को तैयार कर लेना चाहिए।

अंत में इस धार्मिक विशेषज्ञ ने कहा कि हमें कुरआन की आयतों और पैग़म्बरे अकरम (स.ल.व.) की सीरत से सब्र, सहनशीलता, अपनी क्षमता बढ़ाने और आख़िरत की तैयारी का सबक सीखना चाहिए और अल्लाह की दी हुई तरबियत के रास्ते पर चलते हुए पैग़म्बरे अकरम (स.ल.व.) के सच्चे अनुयायी बनने का प्रयास करना चाहिए।

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