दुश्मन सांस्कृतिक आक्रमण के ज़रिए समाज की पहचान को नुकसान पहुँचाना चाहता है।हुज्जतुल इस्लाम सैयद अली सालेह मूसवी

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दुश्मन सांस्कृतिक आक्रमण के ज़रिए समाज की पहचान को नुकसान पहुँचाना चाहता है।हुज्जतुल इस्लाम सैयद अली सालेह मूसवी

हुज्जतुल इस्लाम सैयद अली सालेह मूसवी ने जुमआ की नमाज़ के ख़ुत्बे में हक़ और बातिल के बीच जारी संघर्ष की ओर इशारा करते हुए कहा कि दुश्मनों ने हमेशा पैग़म्बरों को कमजोर करके उनके उद्देश्यों को भटकाने की कोशिश की, लेकिन इलाही रहनुमाओं ने दृढ़ता के साथ हक़ का संदेश समाज तक पहुँचाया।

उन्होंने कहा कि आज भी इस्लाम के दुश्मन कुछ पश्चिमी और क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर इस्लामी देशों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं और यह दुश्मनी अब भी जारी है।

यासूज के अस्थायी इमामे जुमा ने दुश्मनी के आधुनिक और जटिल तरीकों पर ज़ोर देते हुए घुसपैठ करने वाले तत्वों की गतिविधियों के प्रति चेतावनी दी और कहा कि मुनाफ़िक़ाना धाराओं की घुसपैठ के प्रति सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि घुसपैठिए आसानी से पहचाने नहीं जाते और इसी वजह से खुले दुश्मनों की तुलना में अधिक ख़तरनाक होते हैं।

हुज्जतुल इस्लाम मूसवी ने आगे कहा कि इस ख़तरे का उदाहरण क्षेत्र के कुछ हालिया घटनाक्रमों में देखा जा सकता है, जहाँ कुछ लोगों ने प्रबंधन और सैन्य स्तरों में घुसपैठ करके संवेदनशील सूचनाएँ दुश्मनों तक पहुँचाईं और प्रतिरोध के मोर्चे की सुरक्षा को ख़तरे में डाला।

उन्होंने वैज्ञानिक सांस्कृतिक और धार्मिक क्षेत्रों में सतर्कता की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि दुश्मन इस्लाम को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से धार्मिक विज्ञान और अरबी साहित्य तक की शिक्षा हासिल करके वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थानों के भीतर से अपने उद्देश्यों को पूरा करने की कोशिश करते हैं। इसलिए इस क्षेत्र में पहले से अधिक निगरानी और सतर्कता की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि देश के कुछ हिस्सों में 800 वर्ष पुराने वक़्फ़ भी मौजूद हैं। इनमें से कुछ वक़्फ़ सही प्रबंधन के कारण आज भी ग़रीबों और कल्याणकारी कार्यों के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं और समाज को उनसे लाभ मिल रहा है।

उन्होंने प्रांत कोहगिलूयेह और बोयर-अहमद में मौजूद विभिन्न वक़्फ़ संपत्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिकारियों और संबंधित ज़िम्मेदार लोगों को वक़्फ़ की ज़मीनों और संपत्तियों की सुरक्षा में दृढ़ता से काम करना चाहिए, विशेष रूप से उन वक़्फ़ संपत्तियों की, जिन्हें शैक्षणिक या कल्याणकारी कार्यों के लिए समर्पित किया गया है।

हुज्जतुल-इस्लाम मूसवी ने कहा कि वक़्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही वक़्फ़ करने वालों की नीयत के साथ विश्वासघात और सार्वजनिक अधिकारों को नुकसान पहुँचाना है। इसलिए इन संपत्तियों से संबंधित अनुबंधों और कानूनी मामलों की पूरी सावधानी और पारदर्शिता के साथ जाँच की जानी चाहिए।

उन्होंने नहजुल बलाग़ा में हज़रत अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ.स.) की संपत्ति के प्रबंधन और बैतुलमाल के प्रति ज़िम्मेदारी की सीरत का हवाला देते हुए अधिकारियों से इन मामलों की निगरानी पर विशेष ध्यान देने की माँग की।

उन्होंने वक़्फ़ के अधिकारों को नुकसान पहुँचाने से रोकने पर ज़ोर देते हुए कहा कि अधिकारियों को वक़्फ़ और सार्वजनिक संपत्तियों के अधिकारों के हनन के प्रति उदासीन नहीं रहना चाहिए,बल्कि ज़िम्मेदारी और सटीक निगरानी के साथ जनता के अधिकारों तथा वक़्फ़ करने वालों की नीयत की रक्षा करनी चाहिए।

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