ईरान भारत का भरोसेमंद और रणनीतिक साझेदार: आचार्य बालकृष्ण

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ईरान भारत का भरोसेमंद और रणनीतिक साझेदार: आचार्य बालकृष्ण

भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंधों को रेखांकित करते हुए पतंजलि आयुर्वेद के सह-संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण ने ईरान को भारत का रणनीतिक और भरोसेमंद साझेदार बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल राजनीतिक या आर्थिक हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध मौजूद हैं।

आचार्य बालकृष्ण ने यह बात नई दिल्ली में ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पिज़िश्कियान के सम्मान में आयोजित विशेष संवाद एवं स्वागत समारोह के दौरान कही। उन्होंने इस अवसर पर राष्ट्रपति पिज़िश्कियान का अभिनंदन भी किया। कार्यक्रम का आयोजन भारत में इस्लामी गणराज्य ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहली की मेजबानी में किया गया, जिसमें धार्मिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों तथा कारोबारी जगत से जुड़े प्रमुख लोगों ने हिस्सा लिया।

आचार्य बालकृष्ण ने भारत और ईरान की साझा ज्ञान-परंपरा तथा दोनों सभ्यताओं के बीच ऐतिहासिक संपर्कों का उल्लेख करते हुए द्विपक्षीय संबंधों को स्वास्थ्य, पारंपरिक चिकित्सा, संस्कृति, ज्ञान और मानव कल्याण जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया। उनके अनुसार, दोनों देशों की प्राचीन परंपराओं और ज्ञान-संपदा का इस्तेमाल व्यापक मानवीय हितों के लिए किया जा सकता है।

इस अवसर पर ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पिज़िश्कियान ने भी भारत के साथ संबंधों को महत्वपूर्ण बताते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों और कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ संवाद के दौरान कहा कि ईरान शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और स्वतंत्रता की नीति पर कायम है तथा किसी भी प्रकार के दबाव के सामने झुकने के लिए तैयार नहीं है।

कार्यक्रम में ईरान के विदेश मंत्री डॉ. अब्बास अराक़ची, भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहली तथा कश्मीर के मीरवाइज उमर फारूक समेत विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां उपस्थित थीं। कार्यक्रम में धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ भारत-ईरान संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।

आचार्य बालकृष्ण भारतीय योग, आयुर्वेद और पारंपरिक ज्ञान-परंपरा से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व हैं तथा पतंजलि आयुर्वेद के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक हैं। कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा एवं ज्ञान-परंपरा के संदर्भ में भारत-ईरान सहयोग के एक महत्वपूर्ण आयाम को भी सामने रखा।

राष्ट्रपति पिज़िश्कियान इन दिनों 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली में हैं। उनकी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने तथा क्षेत्रीय शांति और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

भारत और ईरान के बीच बढ़ता संवाद ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश अपने ऐतिहासिक संबंधों को आधुनिक आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक सहयोग के नए क्षेत्रों से जोड़ने पर जोर दे रहे हैं।

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