तंजानिया में दीनी छात्रों ने पहना अम्मामा

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तंजानिया में दीनी छात्रों ने पहना अम्मामा

तंजानिया: तंजानिया के शहर तांगा स्थित हौज़ा ए इल्मिया अल-क़ाइम के कई छात्रों ने अपनी प्रारंभिक धार्मिक शिक्षा पूरी करने के बाद इस्लाम धर्म की सेवा और इमाम-ए-अस्र (स.ल.) के सिपाही बनने के संकल्प के साथ धर्मगुरुओं का विशेष परिधान धारण किया। यह धार्मिक शिक्षण केंद्र बिलाल मुस्लिम मिशन तंजानिया की निगरानी में उसकी तांगा शाखा के अंतर्गत संचालित होता है।

31 अक्टूबर 2026 को बिलाल मुस्लिम मिशन तंजानिया के तत्वावधान में 14वां वार्षिक दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर हौज़ा की प्रारंभिक धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम पूरा करने वाले छात्रों को उनकी शैक्षणिक और धार्मिक उपलब्धि के प्रतीक के रूप में धर्मगुरुओं का परिधान पहनाया गया तथा उनकी दस्तारबंदी की गई।

इन छात्रों की दस्तारबंदी धर्म और समाज की सेवा के एक नए सफर की शुरुआत का प्रतीक है। अब उनके कंधों पर धार्मिक शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार, इस्लामी मूल्यों और नैतिकता की रक्षा तथा इस्लामी शिक्षाओं के प्रकाश में मोमिनों का मार्गदर्शन करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।

तंजानिया में दीनी छात्रों ने पहना अम्मामा / दीन की खिदमत और धर्म की सेवा का किया संकल्प

तंजानिया के वरिष्ठ शिया धर्मगुरु शेख जलाला ने समारोह को संबोधित करते हुए स्नातक छात्रों को इस शैक्षणिक और आध्यात्मिक सफलता पर बधाई दी। उन्होंने उन्हें पांच बुनियादी सिद्धांतों का पालन करने की नसीहत की और कहा कि ये सिद्धांत प्रत्येक धार्मिक विद्वान और धर्म के विद्यार्थी के दैनिक जीवन की महत्वपूर्ण विशेषताएं होनी चाहिए।

उन्होंने जिन पांच सिद्धांतों पर विशेष जोर दिया, वे इस प्रकार हैं:

* नमाज को उसके प्रथम समय में अदा करना।

* नमाज-ए-शब का विशेष रूप से ध्यान रखना।

* कुरआन मजीद की लगातार तिलावत करना।

* अच्छे अखलाक और उत्तम नैतिक गुणों से सुसज्जित होना।

* अपनी बातचीत और व्यवहार में सच्चाई तथा ईमानदारी बनाए रखना।

शेख जलाला ने कहा कि ये पांच सिद्धांत उन महत्वपूर्ण बुनियादों में शामिल हैं, जो एक धार्मिक विद्वान के आध्यात्मिक, नैतिक और व्यावहारिक व्यक्तित्व के सही निर्माण में मददगार साबित होते हैं।

तंजानिया में दीनी छात्रों ने पहना अम्मामा / दीन की खिदमत और धर्म की सेवा का किया संकल्प

उन्होंने आगे कहा कि धार्मिक ज्ञान केवल जानकारियों और सैद्धांतिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका प्रभाव इंसान के अमल, चरित्र और दूसरों के साथ उसके व्यवहार में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।

शेख जलाला ने दीक्षांत समारोह में उपस्थित छात्रों को याद दिलाया कि एक धर्मगुरु की जिम्मेदारी केवल ज्ञान प्राप्त करने और धार्मिक शिक्षाओं को सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने ज्ञान पर अमल करना, उसे दूसरों तक पहुंचाना और समाज के सामने एक आदर्श एवं अनुकरणीय व्यक्तित्व प्रस्तुत करना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।

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