नेपाल में हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की सीरत पर अंतरधार्मिक संगोष्ठी का आयोजन

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नेपाल में हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की सीरत पर अंतरधार्मिक संगोष्ठी का आयोजन

नेपाल के नेपालगंज शहर में अय्याम-ए-फ़ातिमिया के अवसर पर ‘हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) का शांति संदेश’ शीर्षक से एक अंतरधार्मिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें शिया, सुन्नी और हिंदू धर्मों से संबंध रखने वाले लगभग 150 लोगों ने भाग लिया।

नेपाल के नेपालगंज शहर में अय्याम-ए-फ़ातिमिया के अवसर पर ‘हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) का शांति संदेश’ शीर्षक से एक अंतरधार्मिक संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें शिया, सुन्नी और हिंदू समुदायों के लगभग 150 लोगों ने शिरकत की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह संगोष्ठी 31 अक्टूबर, शनिवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक नेपालगंज शहर स्थित यूनानी चिकित्सा केंद्र के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित हुई। कार्यक्रम की शुरुआत सुन्नी समुदाय के प्रसिद्ध क़ारी सग़ीर अहमद ख़ान की तिलावते कुरआन मजीद से हुई। इसके बाद सुन्नी छात्र अबू सहमा दानिश ने नात पेश की।

इस अवसर पर सुन्नी शायरों ने भी हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की शान में अपनी काव्यात्मक श्रद्धांजलि पेश की। इनमें अशफ़ाक़, मेराज हिमालय, सैयद अशफ़ाक़ रसूल हाशमी, सरवर नेपाली और हाजी क़दीर अंसारी शामिल थे। इसी तरह शिया और सुन्नी महिलाओं ने भी अशआर के माध्यम से हज़रत ज़हरा (स) के प्रति अपनी श्रद्धा और अकीदत का इज़हार किया। इनमें सना शाद और मसरूर फ़ातिमा शामिल थीं।

श्रीमती शाहिदा शाह वाहिदी ने नेपाली भाषा में तक़रीर करते हुए हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की सीरत और उनके चरित्र के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

संगोष्ठी की विशेष अतिथि नेपाल की हिंदू सांसद सुशीला नेपाली थीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस संगोष्ठी में शामिल होकर उन्हें पहली बार यह जानने का अवसर मिला कि इस्लाम में महिलाओं को पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त है और हिजाब उनकी तरक्की की राह में बाधा नहीं, बल्कि उनकी पवित्रता और शालीनता की रक्षा का माध्यम है। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें पहले इस बात की जानकारी नहीं थी कि इस्लाम में हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) जैसी महान महिला का व्यक्तित्व भी मौजूद है।

सुन्नी धर्मगुरु कलीम आरिफ़ी ने हज़रत ज़हरा (स) की उदारता और दरियादिली पर अपने विचार रखे। वहीं, सुन्नी समुदाय के प्रसिद्ध राजनेता और प्रांतीय विधानसभा के पूर्व सदस्य याक़ूब अंसारी ने कहा कि हमारे विद्वानों ने अब तक इस महान व्यक्तित्व के संबंध में इस प्रकार की कोई संगोष्ठी आयोजित नहीं की है।

बेंगलुरु के अलीपुर शहर से आए अतिथि सैयद अली बाक़िर आबिदी ने भी हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) के फ़ज़ाइल और विशेष गुणों पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर नेपाल में हिंदू धर्म के धार्मिक गुरु योगी चंद्रनाथ महाराज ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को किसी अन्य आदर्श व्यक्तित्व की तलाश करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) का व्यक्तित्व सभी उच्च मानवीय गुणों और श्रेष्ठ विशेषताओं का संपूर्ण आदर्श है।

उल्लेखनीय है कि इस संगोष्ठी के आयोजन और प्रबंधन की जिम्मेदारी हुज्जतुल इस्लाम डॉ. मुहम्मद ज़ैनुल आबिदीन ने निभाई। देश में तेज़ बारिश और गरज-चमक के बावजूद लगभग 150 लोगों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

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