जनता की एकजुटता दुश्मनों की नाकामी का प्रमुख कारण है

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जनता की एकजुटता दुश्मनों की नाकामी का प्रमुख कारण है

ख़ार्ग द्वीप के इमाम ए जुमआ ने कहा कि इस्लामी ईरान में Gen Z ज़ोर-जबरदस्ती, अमेरिका और ज़ायोनी शासन की विरोधी पीढ़ी है। दुश्मनों को अपमान, तौहीन और वास्तविक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के ज़रिए युवाओं को उनकी इस्लामी पहचान और राष्ट्रीय संस्कृति से दूर करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

,हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन महमूद कारगर, इमाम जुमा ख़ार्ग द्वीप ने आज सुबह 13 आबान छात्र दिवस और विश्व साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के अवसर पर आयोजित रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने संस्थापक इमाम ख़ुमैनी (रह.), इस्लामी क्रांति के शहीद रहबर और अन्य महान शहीदों, विशेष रूप से होर्मोज़गान के शजरह तैय्यबा स्कूल तथा लामेर्द के छात्र शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने कहा कि 13 आबान ईरानी राष्ट्र के साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष के इतिहास की तीन महत्वपूर्ण घटनाओं की याद दिलाता है।

उन्होंने 1343 हिजरी शम्सी (1964) में इमाम ख़ुमैनी (रह.) के निर्वासन, 13 आबान 1357 (4 नवंबर 1978) को छात्रों की शहादत और 1358 (1979) में इमाम ख़ुमैनी के अनुयायी छात्रों द्वारा अमेरिका के जासूसी अड्डे पर कब्ज़े का उल्लेख करते हुए कहा कि ये घटनाएं प्रभुत्ववादी शक्तियों के विरुद्ध ईरानी राष्ट्र की स्वतंत्रता और साम्राज्यवाद विरोधी भावना को दर्शाती हैं।

इमाम ए जुमआ ख़ार्ग ने कहा कि ईरानी राष्ट्र के प्रति अमेरिका की दुश्मनी अमेरिकी दूतावास पर कब्ज़े की घटना से पहले से चली आ रही थी। जासूसी अड्डे से प्राप्त दस्तावेज़ों ने ईरान के विरुद्ध अमेरिका के विभिन्न हस्तक्षेपों और साज़िशों का पर्दाफाश किया। इसलिए 13 आबान अमेरिका की दुश्मनी की शुरुआत का दिन नहीं, बल्कि उसकी साज़िशों के एक हिस्से के उजागर होने का दिन है।

हुज्जतुल इस्लाम कारगर ने सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में जनता की भागीदारी के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि विभिन्न परिस्थितियों में जनता की मैदान में मौजूदगी दुश्मनों की नाकामी और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर करने का एक महत्वपूर्ण कारण रही है। आज भी इस भावना को बरकरार रखना आवश्यक है।

उन्होंने युवाओं में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि शिक्षकों, परिवारों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं की ज़िम्मेदारी है कि वे छात्रों को इस्लामी क्रांति के इतिहास और पहलवी शासन के दौर के अत्याचारों से अवगत कराएं। साथ ही, तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाले तत्वों को ऐतिहासिक वास्तविकताओं को उलटने का अवसर न दें।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लामी ईरान की ज़ेड पीढ़ी ज़ोर-जबरदस्ती, अमेरिका और ज़ायोनी शासन का विरोध करने वाली पीढ़ी है। दुश्मनों को अपमान और वास्तविकताओं को विकृत करके युवाओं को उनकी इस्लामी पहचान और राष्ट्रीय संस्कृति से दूर करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

अंत में हुज्जतुल इस्लाम कारगर ने कहा कि ईरानी राष्ट्र अपनी इस्लामी पहचान और राष्ट्रीय संस्कृति पर भरोसा करते हुए स्वतंत्रता, प्रगति और सभ्यता निर्माण के मार्ग पर आगे बढ़ता रहेगा।

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