लेबनान को संकट से बाहर निकालने के लिए राष्ट्रीय एकता और सामूहिक संघर्ष अनिवार्य है

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लेबनान को संकट से बाहर निकालने के लिए राष्ट्रीय एकता और सामूहिक संघर्ष अनिवार्य है

लेबनान के प्रमुख जाफ़री मुफ़्ती और शिया धर्मगुरु हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन शेख अहमद क़बलान ने चेतावनी दी है कि लेबनान को आंतरिक मतभेदों के दबाव में अकेला छोड़ना बेहद ख़तरनाक है। इससे देश एक बड़े राष्ट्रीय संकट का सामना कर सकता है।

 लेबनान के प्रमुख जाफ़री मुफ़्ती शेख अहमद क़बलान ने अपने एक बयान में कहा कि लेबनान को आंतरिक मतभेदों के बोझ तले दबने के लिए अकेला छोड़ देना बेहद ख़तरनाक है। इससे देश व्यापक निष्क्रियता और बुनियादी ढांचे के विनाश की ओर बढ़ सकता है, जिससे राज्य की मूलभूत क्षमताएं प्रभावित होंगी। साथ ही, राष्ट्रीय पहचान और देश के अस्तित्व को मजबूती प्रदान करने वाली संवैधानिक एवं राष्ट्रीय व्यवस्था की नींव भी कमज़ोर हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि ऐसी शासन व्यवस्था लंबे समय तक कायम नहीं रह सकती, जो जनता पर कठोर प्रतिबंध लगाए, भारी करों का बोझ डाले और इसके बावजूद नागरिकों के बुनियादी सामाजिक अधिकारों को सुनिश्चित न करे।

आर्थिक तबाही और गंभीर आर्थिक संकट के बीच यह स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है, जो लेबनान के सामने मौजूद संकट की गहराई को दर्शाती है।

शेख़ अहमद क़बलान ने आगे कहा कि असली समस्या ऐसी शासक शक्तियां हैं, जो राष्ट्रीय मुक्ति और देश को संकट से बाहर निकालने की प्रक्रिया में किसी अन्य पक्ष को भागीदार बनाने के लिए तैयार नहीं हैं, जबकि इस विनाशकारी स्थिति से निकलने का एकमात्र रास्ता सभी राष्ट्रीय शक्तियों और आंतरिक क्षमताओं का संयुक्त प्रयास है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की मांग है कि सभी लेबनानवासियों को एकजुट किया जाए और राष्ट्रीय एकता तथा संकट से मुक्ति के साझा प्रयासों को फिर से मजबूत बनाने के लिए उपलब्ध सभी क्षमताओं का इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मौजूदा लेबनानी सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है।

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