ट्रंप के युद्ध-विरोधी वादों और उनके कार्यों के बीच की खाई की कीमत चुका रही है अमेरिकी जनता

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हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन रिज़वी महेर ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी युद्ध के आर्थिक और सामाजिक परिणामों का उल्लेख करते हुए कहा कि डोनाल्ड ट्रंप महंगे युद्धों से दूर रहने और जनता की आर्थिक स्थिति सुधारने के वादे के साथ व्हाइट हाउस पहुंचे थे, लेकिन आज अपने चुनावी वादों से पीछे हटकर उन्होंने अपनी सरकार की विदेश नीतियों की कीमत अमेरिकी समाज पर डाल दी है।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन रिज़वी महेर ने क़ुम के धार्मिक शिक्षा केंद्र (हौज़ा ए इल्मिया) के छात्रों और विद्वानों की प्रतिनिधि परिषद के अध्यक्ष के रूप में हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के हमदान स्थित संवाददाता से बातचीत में अमेरिका के मध्यावधि चुनावों और रिपब्लिकन पार्टी की हार का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक समाजशास्त्र के दृष्टिकोण से इन चुनावों के परिणामों को केवल सत्ता में बदलाव के रूप में नहीं, बल्कि अमेरिकी सरकार की घरेलू और विदेश नीतियों के प्रति जनमत की प्रतिक्रिया के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जनता की सरकारों से प्रमुख अपेक्षाओं में सुरक्षा, आर्थिक खुशहाली, सामाजिक स्थिरता और भविष्य के लिए स्पष्ट एवं भरोसेमंद दृष्टिकोण शामिल हैं। जब देश के वित्तीय संसाधनों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे में निवेश करने के बजाय विदेशी युद्धों पर खर्च किया जाता है, तो समाज की प्राथमिकताओं और सरकार की नीतियों के बीच दूरी बढ़ने लगती है।

क़ुम के हौज़ा ए इल्मिया के छात्रों और विद्वानों की प्रतिनिधि परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि ईरान के साथ अमेरिकी युद्ध के मामले में सैन्य खर्च इसके परिणामों का केवल एक हिस्सा है। ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि, परिवहन खर्च में इजाफा और आम परिवारों पर बढ़ता आर्थिक दबाव भी ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जो अमेरिकी जनता की राजनीतिक सोच और चुनावी व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।

उन्होंने अमेरिकी विदेश नीति को दिशा देने में ज़ायोनी शासन और बेंजामिन नेतन्याहू की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और ज़ायोनी शासन के युद्ध के विश्लेषण में एक बुनियादी सवाल यह है कि अमेरिकी राष्ट्रीय हितों को ज़ायोनी शासन की सुरक्षा संबंधी मांगों और प्राथमिकताओं से किस हद तक अलग रखा गया है। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू वर्षों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय शक्ति को रणनीतिक खतरा बताकर वॉशिंगटन से अधिक कठोर नीतियां अपनाने की मांग करते रहे हैं।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन रिज़वी महेर ने इस बात पर जोर दिया कि सैन्य श्रेष्ठता का अर्थ अनिवार्य रूप से राजनीतिक जीत हासिल करना नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक अनुभव बताता है कि किसी देश के बुनियादी ढांचे को नष्ट कर देने से उसकी राजनीतिक और सामाजिक इच्छाशक्ति समाप्त नहीं होती। इसके अलावा, लंबे समय तक चलने वाले युद्ध धीरे-धीरे उस देश की जनता के समर्थन को भी कमजोर कर सकते हैं, जिसने युद्ध शुरू किया है।

उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध का आकलन करते समय केवल सैन्य परिणामों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि युद्ध के घोषित उद्देश्यों, संघर्ष की अवधि, आर्थिक लागत, मानवीय परिणामों और युद्ध समाप्त होने की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाना चाहिए।

राजनीतिक समाजशास्त्र में जनविश्वास के महत्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि किसी सरकार की राजनीतिक वैधता केवल चुनावी जीत पर निर्भर नहीं करती, बल्कि जनता का सरकारी फैसलों, वादों और अधिकारियों के कामकाज पर भरोसा भी उसकी वैधता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ट्रंप दूसरे कार्यकाल की शुरुआत आर्थिक परिस्थितियों में सुधार, जीवन-यापन के खर्च में कमी और महंगे युद्धों से बचने के वादों के साथ सत्ता में आए थे। लेकिन चुनावी वादों और सरकार के वास्तविक कामकाज के बीच बढ़ता अंतर सामाजिक समर्थन में कमी और जनता की नाराजगी में वृद्धि का कारण बन सकता है।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन रिज़वी महेर ने अमेरिका के मध्यावधि चुनावों के बाद एसोसिएटेड प्रेस के एक सर्वेक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके परिणामों से पता चलता है कि महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को लेकर चिंता, सरकार के आर्थिक प्रदर्शन से असंतोष तथा भ्रष्टाचार और राष्ट्रपति द्वारा सार्वजनिक हितों के बजाय व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता देने से जुड़ी चिंताओं ने मतदाताओं के चुनावी व्यवहार को प्रभावित किया।

अंत में उन्होंने अमेरिकी चुनावों से दुनिया की सरकारों को मिलने वाले राजनीतिक संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली सरकारें भी जनमत, आर्थिक दबाव और चुनावी व्यवस्था की सीमाओं से बंधी होती हैं। वे लंबे समय तक अपनी विदेश नीतियों की कीमत को घरेलू परिणामों से अलग नहीं रख सकतीं।उन्होंने कहा कि युद्ध अल्पकाल में किसी नेता की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन जीवन-यापन की बढ़ती लागत, असुरक्षा, मानवीय नुकसान और संघर्ष समाप्त होने की स्पष्ट योजना का अभाव सरकार की युद्ध नीतियों के प्रति जनता के समर्थन को कमजोर कर सकता है।

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