आयतुल्लाह अली रज़ा आराफी ने मदरसा फैज़िया और मदरसा आली दारुश्शिफ़ा, क़ुम का अचानक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों और विद्वानों से मुलाक़ात की तथा उनकी शैक्षणिक, आर्थिक और शोध संबंधी समस्याओं को सुना।
आयतुल्लाह अली रज़ा आराफी ने शिया जगत के सबसे प्राचीन और प्रभावशाली शैक्षणिक केंद्रों में शामिल क़ुम के मदरसा फैज़िया और मदरसा दारुश्शिफ़ा का स्थलीय दौरा किया। लगभग 200 मिनट तक चले इस दौरे के दौरान उन्होंने शिक्षकों, प्रशासकों और युवा विद्यार्थियों से प्रत्यक्ष मुलाक़ात की तथा उनकी शैक्षणिक और शोध संबंधी स्थिति के साथ-साथ उनकी समस्याओं का जायज़ा लिया।
हौज़ा इल्मिया के प्रमुख ने मदरसों में पहुँचने के बाद सीधे प्रांगण और मुख्य शैक्षणिक भवनों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जारी शैक्षणिक गतिविधियों, उच्च स्तरीय पाठ्यक्रमों के संचालन और विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपस्थिति की स्थिति की जानकारी प्राप्त की।
हौज़ा इल्मिया के प्रमुख के इस दौरे का एक हिस्सा मदरसा दारुश्शिफ़ा के प्रांगण, विभिन्न हिस्सों, गलियारों और कमरों के बाहर मौजूद युवा विद्यार्थियों तथा विद्वानों के साथ अनौपचारिक बातचीत के लिए भी निर्धारित था।
युवा विद्यार्थियों और उच्च स्तरीय शोध एवं अध्ययन में लगे विद्वानों ने खुलकर और सहजता के साथ अपनी प्रमुख समस्याएँ और माँगें प्रस्तुत कीं। इनमें निम्नलिखित मुद्दे शामिल थे:
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आर्थिक और आवास संबंधी समस्याएँ: मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में मेहनती और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए कल्याणकारी सुविधाओं और सहायता व्यवस्था को मजबूत बनाने की आवश्यकता।
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शैक्षणिक व्यवस्था और पाठ्यपुस्तकें: हौज़ा की प्राचीन शैक्षणिक विरासत की मौलिकता बनाए रखते हुए पाठ्यक्रमों और पुस्तकों में सोच-समझकर बदलाव करने की आवश्यकता।
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शोध संबंधी मार्गदर्शन और प्रचार-प्रसार के आधुनिक अवसर: इस्लामी علوم में विशेषज्ञता को बढ़ावा देना, शोध को समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना और सोशल मीडिया के क्षेत्र में प्रभावी ढंग से सक्रिय होना।
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हौज़ा के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सहयोग: मेधावी विद्यार्थियों के लिए अध्यापन, विशेषज्ञता आधारित धार्मिक मंचों और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों में भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराना।
आयतुल्लाह आराफी ने भी धैर्यपूर्वक विद्यार्थियों की बातों और सुझावों को सुना, महत्वपूर्ण बिंदुओं को नोट किया और उनके सवालों तथा माँगों का जवाब दिया।
हौज़ा इल्मिया के प्रमुख ने शैक्षणिक योजनाओं और सुधार कार्यक्रमों की व्याख्या करते हुए कहा कि हौज़ा का बुनियादी ढाँचा शिया मत की अमूल्य पूँजी है। युवा विद्यार्थियों की आवाज़ और उनके विचारों को सुनना केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि हौज़ा के भविष्य के प्रबंधन और नीतिगत निर्णय लेने का एक महत्वपूर्ण आधार है।
शिक्षकों और मदरसों के प्रशासकों के साथ विचार-विमर्श
इस 200 मिनट के दौरे के दौरान हौज़ा इल्मिया के प्रमुख ने प्रशासनिक अधिकारियों, शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण विभागों के प्रमुखों और मदरसा फैज़िया तथा दारुश्शिफ़ा के कुछ शिक्षकों के साथ भी बैठक की। इसमें उन्होंने शिक्षण व्यवस्था और जारी कार्यक्रमों की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में निम्नलिखित विषयों पर चर्चा हुई:
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हौज़ा की पारंपरिक और प्रभावी शैक्षणिक व्यवस्था: शैक्षणिक चर्चा, व्याख्यान तैयार करने और शिक्षक तथा विद्यार्थी के बीच प्रत्यक्ष संवाद की परंपरा को पुनर्जीवित करने पर ज़ोर दिया गया। यह परंपरा ऐतिहासिक रूप से हौज़ा के मदरसों की विशिष्ट पहचान रही है।
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आधुनिक प्रशासनिक प्रणालियों का उपयोग: शैक्षणिक सुविधाओं के स्तर में सुधार, मदरसों को डिजिटल पुस्तकालयों से सुसज्जित करना और विद्यार्थियों के लिए प्राथमिक एवं महत्वपूर्ण शोध स्रोतों तक पहुँच आसान बनाना।
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शिक्षकों की आदर्श भूमिका पर ज़ोर: तर्कशास्त्र और धर्मशास्त्र सहित बौद्धिक एवं परंपरागत ज्ञान की शिक्षा के साथ-साथ प्रशिक्षण, नैतिकता और चरित्र निर्माण के पहलुओं को भी प्रमुखता देना, ताकि आत्मशुद्धि और नैतिक विकास शैक्षणिक प्रगति के साथ-साथ आगे बढ़ें।
आयतुल्लाह आराफी ने मदरसा फैज़िया और दारुश्शिफ़ा के प्रशासनिक कर्मचारियों की दिन-रात की मेहनत और समर्पित सेवाओं की सराहना की। उन्होंने इन दोनों मदरसों को क़ुम के बौद्धिक और आध्यात्मिक आंदोलन की अग्रिम पंक्ति में शामिल बताया। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की निरंतर समीक्षा करने पर भी बल दिया।















