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तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में शुक्रवार 6 मोहर्रम की रात को शहीदों के सरदार इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की पहली मजलिस का आयोजन हुआ, जिसमें इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने शिरकत की।

तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में शुक्रवार 6 मोहर्रम की रात को शहीदों के सरदार इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की पहली मजलिस का आयोजन हुआ, जिसमें इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने शिरकत की।

 

लखनऊ के मशहूर छोटे इमामबाड़े, हुसैनाबाद में हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना अकी़ल अब्बास मरूफी़ ने खिताब करते हुए फरमाया,क्या वाकियन इस बात को तस्लीम किया जा सकता है कि जिस रसूल ने रिसालते इलाहिया की तबलीग़ में तमाम रंजो अलम उठाए, काटों भरे दुश्वार रास्ते तये किए, तरहं तरहं की सख्ति़यां और अज़ीयतें बर्दाश्त की और किसी छोटे से छोटे हुक्मे इलाही को बयां करने से गुरेज नहीं किया तो इतने बड़े मसले, मसले खि़लाफत को कैसे छोड़ सकता है और मुसलमानों का रहनुमा, रहबर और ख़लीफा़ और इमाम मुअय्यन किए बग़ैर कैसे लोगों को उनके हाल पर छोड़ कर दुनिया से चला जाए?

लखनऊ के मशहूर छोटे इमामबाड़े, हुसैनाबाद में 2 साल से रात 8:15 बजे अशरा ए मजालिस का एहतिमाम किया जा रहा है जिस अशरा ए मजालिस को मौलाना अकी़ल अब्बास मारूफी़ साहब खि़ताब कर रहे हैं मौलाना ने फरमाया,

मजलिस को खि़ताब करते हुए मौलाना ने फरमाया,क्या वाके़यन इस बात को तस्लीम किया जा सकता है कि जिस रसूल ने रिसालते इलाहिया की तबलीग़ में तमाम रंजो अलम उठाए, काटों भरे दुश्वार रास्ते तये किए, तरहं तरहं की सख्ति़यां और अज़ीयतें बर्दाश्त की और किसी छोटे से छोटे हुक्मे इलाही को बयां करने से गुरेज नहीं किया तो इतने बड़े मसले, मसले खि़लाफत को कैसे छोड़ सकता है और मुसलमानों का रहनुमा, रहबर और ख़लीफा़ और इमाम मुअय्यन किए बग़ैर कैसे लोगों को उनके हाल पर छोड़ कर दुनिया से चला जाए?

इसके बाद मौलाना ने करबला में हुए जुल्म को बयान किया तो मजमा अश्कबार हो गया।

लेबनान के लोकप्रिय जनांदोलन और प्रभावी राजनैतिक दल हिज़्बुल्लाह और अवैध राष्ट्र इस्राईल के बीच तनाव अपने चरम पर है।

 लेबनान के रेसिस्टेंस ग्रुप हिज्बुल्लाह ने जानकारी दी कि उसने जायोनी सेना की स्ट्राइक के जवाब में ड्रोन हमले किए हैं।

हिज़्बुल्लाह ने कहा कि उसने नॉर्दन बॉर्डर पर ज़ायोनी सेना के ठिकानों को निशाना बनाया है। 10 जून को अवैध राष्ट्र ने लेबनान की सीमा के अंदर हवाई हमले किए थे। अल जजीरा की खबर के मुताबिक इन हमलों में हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरुल्लाह का पूर्व बॉडीगार्ड मारा गया है।

तालिबान की हरकतों से चिंतित चीन ने ताजिकिस्तान में सीक्रेट मिलिट्री बेस बनाया है। यह खुलासा सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ है । असल में चीन ने ताजिकिस्तान में काफी ज्यादा निवेश कर दिया है।

चीन अपने निवेश को बचाए रखने के लिए वह मिलिट्री फुटप्रिंट बढ़ाना चाहता है।

चीन ने ताजिकिस्तान में जो निवेश किया है, उसे अफगानिस्तान के तालिबान से खतरा है। इसलिए चीन वहां मिलिट्री बेस बना रहा है। इसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं था लेकिन अब सैटेलाइट तस्वीर आने के बाद यह खुलासा हो चुका है। चीन ने इस सीक्रेट मिलिट्री फैसिलिटी को 13 हजार फीट ऊंचे पहाड़ पर बनाया है।

 

 

गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि गाजा पट्टी के विभिन्न क्षेत्रों पर ज़ायोनी आक्रमण में शहीदों की संख्या 38 हजार 345 हो गयी है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी बताया है कि इस हमले में घायलों की संख्या 88 हजार 295 तक पहुंच गई है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में गाजा पट्टी के विभिन्न इलाकों में कम से कम 50 फिलिस्तीनी शहीद हो गए और 54 घायल हो गए।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर के बाद से गाजा के खिलाफ ज़ायोनी सरकार की आक्रामकता में 38,000 से अधिक फ़िलिस्तीनी शहीद हो चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या बच्चों और महिलाओं की है।

45 दिनों की लड़ाई के बाद, 24 नवंबर को इज़राइल और हमास के बीच संघर्ष विराम पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके दौरान कैदियों का आदान-प्रदान किया गया।

7 दिनों तक जारी रहने के बाद अस्थायी युद्धविराम हुआ और पहली दिसंबर से ज़ायोनी सरकार ने ग़ाज़ा पर फिर से हमले शुरू कर दिए, जो अब भी जारी हैं और बड़े पैमाने पर नागरिक शहीद हो रहे हैं।

आज इमामबाड़ा गुफरान मआब में अशरए मोहर्रम की चौथी मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना कल्बे जवाद नक़वी साहब ने हदीसे रसूल की रोशनी में अहलेबैत अलै. और इमाम हुसैन की अजमत को बयान करते हुए फ़रमाया कि रसूल अल्लाह स. ने फ़रमाया है कि मेरा हुसैन हिदायत का चिराग और नजात की कश्ती है दूसरी हदीस में है कि मेरे अहले बैत की मिसाल नूह की कश्ती जैसी है जो इस पर सवार हुआ वह नजात पा गया और जिसने अपना मुंह मोड़ लिया वह डूब गया पहली हदीस में रसूल ने सिर्फ इमाम हुसैन को नजात की कश्ती बताया है और दूसरी हदीस में तमाम अहलेबैत को सफिनए नजात बताया है मौलाना ने कहा कि हमारे लिए रसूल अकरम स. की सीरत और सुन्नत हुज्जत है मौलाना ने मसाएब में जनाबे मुस्लिम के बेटों की शहादत का जिक्र इस तरह से किया कि मजमे में कोहराम मच गया और गिरिया की आवाज़ बुलंद हो गई।

 

ज़ैनब, शहीदों के ख़ून का संदेश लानी वाली, अबाअब्दिल्लाहिल हुसैन (अ) की क्रांति की सूरमा, अत्याचारियों और उनके हामियों को अपमानित करने वाली, सम्मान, इज़्ज़त, लज्जा, सर बुलंदी और श्रेष्ठता की उच्चतम चोटी पर स्थित महिला का नाम है।

पैग़म्बरे इस्लाम (स) के परिवार में हज़रत ज़ैनब (स) का स्थान इतना अधिक उच्च और आपका पद इतना ऊँचा है कि क़लम आपकी श्रेष्ठता को लिख नहीं सकता और ज़बान उसको बयान नहीं कर सकती है।

महान फ़क़ीह और इतिहासकार अल्लामा मोहसिन अमीन आमुली हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाहे अलैहा की महानता को बयान करते हुए फ़रमाते हैं

“हज़रत ज़ैनब, महिलाओं में सबसे अधिक महान और उनकी फ़ज़ीलत इससे कहीं अधिक है कि उसको बयान किया जा सके या क़लम उसके लिख सके”।

हज़रत ज़ैनब (स) के व्यक्तित्व की उच्ता, महानता, तार्किक शक्ति, अक़्ल की श्रेष्ठता, ज़बान की फ़साहत और बयान की बलाग़त कूफ़े और शाम में आपने जो ख़ुत्बे दिये हैं उनमें दिखाई देती है और बताती है कि यह उस अली (अ) की बेटी है जिसने अपने युग में वह खुत्बे दिये कि अगर आज उनके एक छोटे से भाग को एक पुस्तक के रूप में संकलित कर दिया गया तो उसका नाम नहजुल बलाग़ा हो गया और दुनिया आज भी उसको देखकर अचंभित है। आपने यज़ीद और इबने जियाद के मुक़ाबले में इस प्रकार तार्किक बाते की हैं और ख़ुत्बे दिये हैं कि इन मलऊनों को ख़ामोश कर दिया और उनको इतना तर्क विहीन कर दिया कि उन लोगों ने बुरा भला कहने, गालियां देने और उपहास को अपना हथियार बनाया जो यह दिखाता है कि उनके पास अपने बचाओ के लिये कोई तर्क नहीं रह गया है।

हज़रत ज़ैनब (स) ने अपने चचाज़ाद अब्दुल्लाह बिन जाफ़र बिन अबी तालिब से शादी की और आपके “अली ज़ैनबी” “औन” “मोहम्मद” “अब्बास” और “उम्मे कुलसूम” नामक संतानें हुआ जिनमें से औन और मोहम्मद कर्बला के मैदान में विलायत की सुरक्षा करते हुए हुसैन (अ) पर शहीद हो गये।

हज़रत ज़ैनब (स) एक ऐसी हस्ती हैं जिनको इतिहास की पुस्तकों में “उम्मुल मसाएब” यानी मुसीबतों की माँ कहा गया है, और अगर आपकी जीवनी का अध्ययन किया जाए तो पता चलता है कि आपको उम्मुल मसाएब सही कहा गया है, उन्होंने अपने नाना पैग़म्बरे इस्लाम (स) के निधन का दुख देखा, अपनी माँ और सैय्यद ए निसाइल आलमीन हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स) की अत्याचारों और ज़ुल्म सहने के बाद शहादत को देखा, अपने पिता अमरुल मोमिनी हज़रत अली (अ) के ग़मों और अंत में इबने मुलजिम के हाथों मस्जिद में शहादत को बर्दाश्त किया, आपने अपने भाई हसन (अ) के जिगर के बहत्तर टुकड़ों को तश्त में गिरते देखा, और इन सबके बाद कर्बला में अपने चहेते भाई हुसैन (अ) को तीन दिन का भूखा प्यासा बर्बरता से शहीद होते देखा, औऱ आपकी मुसीबतें यहीं समाप्त नहीं हुईं बल्कि हुसैन (अ) की शहादत के बाद क़ैदी बना कर आपको अहले हरम के साथ कभी कूफ़ा के बाज़ारों में बे पर्दा घुमाया गया तो कभी शाम के दरबार में यज़ीदियों के सामने लाया गया।

ज़ैनब (स) इमाम हुसैन (अ) की क्रांति के आरम्भ से ही अपने भाई के साथ थी और इस आन्दोलन के हर पड़ाव पर अपने भाई की हमदम और हमराह थी, शबे आशूर कभी अपने भाई से बात करती दिखाई देतीं हैं तो, कभी आशूर के दिन शहीदों की लाशों का स्वागत करती है, ग्यारह मोहर्रम की रात हुसैन की पामाल लाश के पास फ़रियाद करना और पैग़म्बर (स) को संबोधित करके यज़ीदियों की शिकायत करना यह सब आपके जीवन के वह स्वर्णिम अध्याय हैं जो आपकी महानता, श्रेष्ठता और फ़ज़ीलत को बयान करते हैं।

आपने आशूर के बाद यतीम बच्चों की सरपरस्ती की औऱ हुसैन (अ) के आन्दोलन को जन जन तक पहुँचाया।

कूफे में जब लोगों ने पैग़म्बर (स) के परिवार वाली को इस दयनीय स्थिति में देखा और रोना आरम्भ किया तो आपने इस प्रकार फ़रमायाः

“हे कूफ़े वालों! हे धोखे बाज़ों! और ख़यानत करने वालों और बेवफ़ाओं! तुम्हारी आँखों से आँसू न सूखें और तुम्हारी आवाज़ें बंद न हो.... वाय हो तुम पर जानते हो पैग़म्बर के किस जिगर को टुकड़े टुकड़े किया है और किस संधि को तोड़ा है और कौन पर्दा नशीन महिलाओं को बाहर लाए हो और उनके सम्मान को ठेस पहुँचाई है और किस ख़ून को बहाया है”

कूफ़े में ज़ैनब (स)  के रूप में अली (अ) थे जो बोल रहे थे और जिन्होंने अली को सुना था वह कह रहे थे “ईश्वर की सौगंध इस प्रकार की बा हया और पर्देदार बोलने वाली महिला को नहीं देखा थे ऐसा लगता है जैसे कि अपने अंदर अली (अ) की ज़बान रखती है”।

जब इबने ज़ियाद ने अहंकार में चूर हो कर अपने दरिंगदी दिखाते हुए आलुल्लाह को बुरा भला कहा तो आपने सदैव बाक़ी रह जाने वाले शब्दों से उसको झूठ को उजागर कर दिया और फ़रमायाः

“ईश्वर की सौगंध, तू ने हमारे बुज़ुर्ग को क़त्ल कर दिया और मेरे परिवार को बरबाद कर दिया और मेरी शाखों को काट दिया और मेरी जड़ों को उखाड़ दिया, अगर यह कार्य तेने इंतेक़ाम की आग को ठंडा करता है तो तू ठंडा हो गया”।

और जब यज़ीद ने अपने तख़्त पर बैठ कर अपने लोगों और दूसरे देशों से आए दूतों के सामने अपनी शक्ति को दिखाने के लिये यह दिखाना चाहा कि जो कुछ हुआ है वह अल्लाह का किया हुआ है, तो हज़रत ज़ैनब (स) उठ खड़ी हईं और अपने अपने ख़ुत्बे को इस प्रकार आरम्भ कियाः

“हे आज़ाद किये गए दासों के बेटे (यह कहकर आपने सबके सामने यज़ीद की वास्तविक्ता को खोल कर रख दिया) क्या यह न्याय है कि तेरी औरते हैं दासिया तो पर्दे में रहे और पैग़म्बर के ख़ानदान की औरतों को तू क़ैदी बनाए? तूने उनके पर्दों को खोल दिया उनके चेहरों को खोल दिया और उनको एक शहर से दूसरे शहर घुमाते हैं”?

आपने अपने इस थोड़े से शब्दों से यज़ीद के सारे इतिहास जंग में ग़ुलाम होने और आज़ाद किये जाने उसके पूर्वजों के इस्लाम लाने आदि को बयान कर दिया और इस प्रकार सबको यह बता दिया कि यह व्यक्ति जो अपने आप को ख़लीफ़ा कह रहा है और इस्लामी हुकूमत पर राज कर रहा है वह इसके योग्य नहीं है।

यह हज़रत ज़ैनब (स) के ख़ुत्बों और शब्दों का ही प्रभाव था कि यज़ीन ने शाम को उग्र होते हुए देखा और उसकों चिंता हुई की कही अली की बेटी की यह बातें उसके तख़्त को न हिला दें तो उसने आपको शाम से मदीने की तरफ़ भेज दिया।

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दानिशनान ए अमीरुल मोमिनीन (अ) जिल्द 1 पेज 167

अंतरराष्ट्रीय अली असग़र दिवस के प्रोग्राम में माएं अपने दुधमुंहे बच्चों को करबला में शहीद होने वाले 6 महीने के अली असग़र की याद में मख़सूस हरा लिबास पहनाकर लाती हैं और हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम से नज़्र व अहद करती हैं।

ऐ साहिबुज़्ज़मान। मैं अपने बच्चे को आपकी नुसरत व मदद के लिए नज़्र कर रही हूं। इसको अपने ज़ुहूर के लिए जो क़रीब है चुन लीजिए और हिफ़ाज़त फ़रमाइये।

ज्ञात रहे कि अली असग़र दिवस दुनिया के 45 देशों में मुहर्रम महीने के पहले जुमे को एक साथ मनाया जाता है।

हज़रत अली असग़र, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के 6 महीने के बेटे थे जो करबला में मौजूद थे यह भी भूखे प्यासे थे और जब इमाम हुसैन अलै. ने इनके लिए पानी मांगा तो हुरमुला ने तीन भाल के तीर से इन्हें भी भूखा प्यासा बेरहमी से शहीद कर दिया था।

मुहर्रम महीने के पहले अशरे में सिडनी में बच्चों के लिए अज़ादारी के प्रोग्राम किए गए और अंजुमनों ने भी इमाम हुसैन अलै. का ग़म मनाया।

गाज़ा शहर के विभिन्न क्षेत्रों पर इज़राइल द्वारा कल रात किए गए हमलों में कई फ़िलिस्तीनी शहीद और घायल हो गए

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,एक रिपोर्ट के अनुसार , गुरुवार की सुबह फ़िलिस्तीनी मीडिया ने गाज़ा शहर के विभिन्न क्षेत्रों पर कब्ज़ा करने वाली ज़ायोनी सेना के लगातार हमलों और बमबारी की सूचना दी हैं।

अलजज़ीरा नेटवर्क ने बताया कि गाजा शहर के अलरेमाल और तल अलहावी क्षेत्रों पर ज़ायोनी सेना द्वारा तीव्र हमले किए गए हैं साथ ही गाजा शहर के पश्चिम में अंसार पर कब्ज़ा कर लिया गया है।

दूसरी ओर अलमयादीन नेटवर्क ने यह भी बताया हैं कि अलमगाज़ी शिविर दक्षिण में खान यूनिस शहर के पूर्वी क्षेत्र में और अलमगाज़ी शिविर मध्य में स्थित है गाजा पट्टी को भी ज़ायोनीवादियों ने निशाना बनाया हैं।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर, 2023 से गाजा पट्टी पर आपराधिक हमले शुरू होने के बाद से ज़ायोनी सरकार ने 38,000 से अधिक फ़िलिस्तीनियों को मार डाला है और कम से कम 88,000 लोग घायल हुए हैं जिन्हें इन परिस्थितियों में निकालना मुश्किल है और हजारों लापता हैं जिनका अभी भी पता नहीं चल पाया है।