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 इस्लामी संगठन हमास ने युद्धविराम होते ही गाज़ा पट्टी पर अपना नियंत्रण फिर से सँभाल लिया है और शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के लिए सात हज़ार सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया है।

ब्रिटिश अख्बार फाइनेंशियल टाइम्स ने दावा किया है कि हमास ने ज़ालिम इज़राइली सरकार के साथ युद्धविराम समझौते के कुछ ही घंटों बाद गाज़ा पट्टी पर पुनः नियंत्रण पाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अरब मीडिया सूत्रों के मुताबिक़, हमास ने गाज़ा के विभिन्न इलाक़ों में, जहाँ से ज़ालिम यहूदी सैनिक पीछे हट चुके हैं, लगभग सात हजार सुरक्षा कर्मी तैनात किए हैं ताकि वहाँ शांति और सुरक्षा बनाए रखी जा सके।

रिपोर्ट में बताया गया है कि हमास के जवान गाज़ा की सड़कों पर गश्त कर रहे हैं ताकि ज़ालिम इज़राइली एजेंट या आतंकी तत्व मौजूदा हालात का गलत फायदा न उठा सकें।

यह ध्यान देने वाली बात है कि राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, युद्धविराम के तुरंत बाद हमास का यह कदम इस बात का संकेत है कि संगठन न केवल गाज़ा के आंतरिक प्रशासन को बनाए रखना चाहता है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी अपना प्रभाव और पकड़ फिर से मजबूत कर रहा है।

 

आज ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आह्वान पर जंतर-मंतर (नई दिल्ली) पर वक़्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ धरना दिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का मानना है कि भारत सरकार द्वारा पारित वक़्फ संशोधन कानून 2025 देश के संविधान में मुसलमानों को दिए गए अधिकारों से उन्हें वंचित करता है, इसलिए यह मुसलमानों के लिए स्वीकार्य नहीं है।

बोर्ड ने इसके खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन, धरना, जनसभाएं, सेमिनार, गोलमेज सम्मेलन और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए हैं। पहले चरण के पूरा होने के बाद, बोर्ड ने अब दूसरे चरण का रोडमैप जारी किया है, जिसके तहत जंतर-मंतर पर बोर्ड के सदस्यों ने पहला कार्यक्रम धरने के रूप में आयोजित किया।

बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. कासिम रसूल इलियास ने कार्यक्रम की शुरुआत की और धरने का उद्देश्य बताया। इसके बाद प्रमुख हस्तियों ने संबोधित किया।

मुख्य वक्ताओं  मे तालिब रहमानी (पश्चिम बंगाल),  आरिफ मसूद (मध्य प्रदेश),  इब्न सऊद (तमिलनाडु), रफीउद्दीन (महाराष्ट्र), मोहम्मद सुलेमान (कर्नाटक), अनिसुर रहमान कासमी (बिहार), उबैदुल्लाह आज़मी (उत्तर प्रदेश), अब्दुल हफीज (एसआईओ अध्यक्ष), फज़लुर रहीम मुजद्दिदी (बोर्ड महासचिव), जॉन दयाल (क्रिश्चियन काउंसिल), असदुद्दीन ओवैसी (सांसद), मोहिबुल्लाह नदवी (सांसद), ज़ियाउद्दीन सिद्दीकी (विफाकुल मदारिस), मोहसिन तकवी (बोर्ड उपाध्यक्ष), अख्तर रिजवी (गुजरात), मौलाना असगर अली इमाम मेहदी (जमीयत अहले हदीस), सययद सादतुल्लाह हुसैनी (जमात-ए-इस्लामी), खालिद सैफुल्लाह रहमानी (बोर्ड अध्यक्ष) शामिल थे।

प्रमुख मांगें:

  • वक़्फ संशोधन कानून को तुरंत रद्द किया जाए
  • मुसलमानों के धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाए
  • वक़्फ संपत्तियों पर किसी तरह का हस्तक्षेप न किया जाए

वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि यह कानून मुसलमानों को उनकी वक़्फ संपत्तियों से वंचित करने की साजिश है, और जब तक इसे रद्द नहीं किया जाता, वे इसके खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।

 

यमन के रक्षा मंत्री मोहम्मद नासिर अलअताफी ने कहा है कि यमन अंतिम सांस तक फिलिस्तीनी जनता के न्यायसंगत संघर्ष का समर्थन जारी रखेगा।

यमन के रक्षा मंत्री मोहम्मद नासिर अल-अताफी ने अंसारुल्लाह के नेता अब्दुल मलिक अल-हौसी को 14 अक्टूबर की महान विजय की 62वीं वर्षगांठ पर बधाई देते हुए कहा है कि यमन फिलिस्तीनी राष्ट्र के न्यायसंगत संघर्ष में हमेशा उनके साथ खड़ा रहेगा।

अलअताफी ने अपने संदेश में कहा कि यमन अपनी नीतिगत प्रतिबद्धता दोहराएगा और फिलिस्तीनी भाइयों को अकेला नहीं छोड़ेगा बल्कि अंतिम सांस तक उनकी मदद और समर्थन जारी रखेगा।

उन्होंने 14 अक्टूबर के क्रांतिकारी रुख को मुक्तिदायक बताते हुए साम्राज्यवादी ताकतों और उनके समर्थकों को स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी ऐसी योजना या प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जो न्यायसंगत और व्यापक शांति के अवसरों को नष्ट कर सके।

रक्षा मंत्री के अनुसार यमन ऐसे अवसरों को बर्बाद होने की अनुमति नहीं देगा और क्षेत्र में न्यायसंगत शांति की स्थापना के लिए उठाए जाने वाले कदमों के खिलाफ किसी भी साजिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

 

मजलिस-ए-वहदत-ए-मुस्लिमीन पाकिस्तान के केंद्रीय महासचिव अल्लामा सय्यद हसन ज़फ़र नक़वी ने लाहौर, मुरीद के, इस्लामाबाद और अन्य शहरों में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर राज्य द्वारा हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि विरोध करना हर पाकिस्तानी का संवैधानिक और कानूनी अधिकार है, जबकि अपने ही नागरिकों पर बर्बर बल का प्रयोग सबसे खराब तानाशाही का प्रतीक है।

मजलिस-ए-वहदत-ए-मुस्लिमीन पाकिस्तान के केंद्रीय महासचिव अल्लामा सय्यद हसन ज़फ़र नक़वी ने लाहौर, मुरीद के, इस्लामाबाद और अन्य शहरों में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर राज्य द्वारा हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि विरोध करना हर पाकिस्तानी का संवैधानिक और कानूनी अधिकार है, जबकि अपने ही नागरिकों पर बर्बर बल का प्रयोग सबसे खराब तानाशाही का प्रतीक है।

"आज मतभेद को सबसे बड़ा अपराध और गुनाह बताया जा रहा है, जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के सिद्धांतों के खिलाफ है।" उन्होंने चेतावनी दी कि इस दमन और अत्याचार का अंत देश और राष्ट्र के लिए हानिकारक साबित होगा।

उन्होंने कहा कि तथाकथित लोकतांत्रिक शासकों को यह सच्चाई समझ लेनी चाहिए कि फॉर्म 47 पर खड़ी व्यवस्था ज्यादा दिन नहीं चल सकती। ऐसी कृत्रिम राजनीतिक संरचनाएं कभी भी टिकाऊ साबित नहीं होतीं।

अल्लामा हसन ज़फर नकवी ने आगे कहा: "जब अत्याचार और अन्याय का पहिया उल्टा चलेगा, तो यही हालात शासकों के दरवाजे पर भी दस्तक देंगे। और जब उन पर मुश्किल समय आएगा, तो उनके समर्थन में कोई आवाज नहीं उठेगी।"

उन्होंने राज्य संस्थाओं से मांग की कि वे राजनीतिक मतभेद रखने वाले नागरिकों के साथ बल के बजाय बातचीत और सहनशीलता का रवैया अपनाएं, क्योंकि राष्ट्रीय स्थिरता संवैधानिक सर्वोच्चता और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के सम्मान पर निर्भर करती है।

 

ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बेबुनियाद आरोपों को खारिज करते हुए वाशिंगटन को आतंकवाद का सबसे बड़ा संरक्षक करार दिया है।

डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को मिस्र के शहर शर्म अलशेख में होने वाली एक अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलन में शामिल होने से पहले इजरायली संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि ईरान, अमेरिका के साथ शांति समझौता करना चाहता है भले ही वह यह कहे कि हम कोई समझौता नहीं करना चाहते।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा जनक और आतंकवादी व नरसंहार करने वाली ज़ायोनी राज्य का समर्थक अमेरिका दूसरों पर आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रखता।

बयान में आगे कहा गया कि ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के बारे में झूठे आरोपों को बार-बार दोहराने से किसी भी तरह अमेरिका और इजरायली सरकार की ओर से ईरान की सीमा का उल्लंघन करके किए गए संयुक्त अपराधों को वैध नहीं ठहराया जा सकता।

गौरतलब है कि पिछले दिनों डोनाल्ड ट्रम्प ने इजरायली संसद को संबोधित करते हुए ईरान के साथ शांति समझौते की उम्मीद जताते हुए कहा कि अगर ईरान के साथ शांति समझौता हो जाए तो यह बहुत शानदार बात होगी।

ट्रम्प ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की 2015 के ईरान परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने पर आलोचना करते हुए इसे 'एक तबाही' करार दिया था।

 

आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली ने कहा: यह लिबास पैगंबर-ए-इस्लाम (स) का लिबास है। हमें बहुत सावधान और पवित्र रहना चाहिए। हम केवल अपनी बात लोगों के कानों तक पहुँचा सकते हैं, लेकिन बात कान से दिल तक हमारे अच्छे कर्मों से पहुँचती है, हमारी तक़रीरो से नहीं।

आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली ने उलेमा के पवित्र लिबास के महत्व पर बात करते हुए कहा:

आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली ने कहा: यह लिबास पैगंबर-ए-इस्लाम (स) का लिबास है। हमें बहुत सावधान और पवित्र रहना चाहिए। हम केवल अपनी बात लोगों के कानों तक पहुँचा सकते हैं, लेकिन बात कान से दिल तक हमारे अच्छे कर्मों से पहुँचती है, हमारी तक़रीरो से नहीं।

अगर हम किताब लिखते हैं, तो बस इतना होता है कि हमारी बातें लोगों की आँखों तक पहुँच जाती हैं, ताकि वे पढ़ सकें। लेकिन देखने से समझने तक, बाहर से अंदर तक बात हमारे अच्छे कामों के जरिए पहुँचती है।"

हमें अपनी क़ीमत पहचाननी चाहिए, क्योंकि हम ईश्वर के पैगंबरों के वारिस बनना चाहते हैं, हम अली इब्न अबी तालिब (अ) के बेटे कहलाना चाहते हैं।"

 

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अपने साप्ताहिक टेलीविजन कार्यक्रम में कहा है कि फिलिस्तीन का मुद्दा मानवता का सबसे पवित्र मुद्दा है।

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अपने साप्ताहिक टेलीविजन कार्यक्रम में कहा है कि फिलिस्तीन का मुद्दा मानवता का सबसे पवित्र मुद्दा है।

उन्होंने प्रस्ताव दिया कि वेनेजुएला की निर्माण टीमों, किसानों और डॉक्टरों को गाजा भेजा जाए ताकि वे वहां के लोगों की मदद कर सकें और उनके साथ खड़े रह सकें। मादुरो ने आशा जताई कि मौजूदा युद्धविराय सिर्फ एक और औपचारिक समझौता साबित न हो, बल्कि नरसंहार के पीड़ितों के लिए वास्तविक न्याय लाए।

राष्ट्रपति मादुरो ने जोर देकर कहा कि अमेरिका मिस्र, तुर्की और कतर को चाहिए कि वे गाजा के पुनर्निर्माण, वेस्ट बैंक और यरूशलम को फिलिस्तीनी राज्य की राजधानी के रूप में मान्यता देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिलिस्तीनी राज्य और निर्वाचित सरकार की मान्यता के व्यावहारिक कदमों को सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि अगर किसी समझौते के साथ न्याय नहीं होता है तो वह सिर्फ मलबे की शांति कहलाएगा। उन्होंने गाजा में हुई मौतों को नरसंहार बताते हुए कहा,क्या इस नरसंहार पर न्याय होगा? 65 हजार लोग मिसाइल हमलों में मारे गए, जिनमें 25 हजार से ज्यादा लड़के और लड़कियां शामिल हैं।

मादुरो ने कहा कि अमेरिका में जनता की राय फिलिस्तीनियों के पक्ष में बदल रही है। सर्वे के मुताबिक 60 फीसदी अमेरिकी जनता फिलिस्तीनी रुख का समर्थन करती है और गाजा की स्थिति को नरसंहार मानती है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर विरोध प्रदर्शनों को जारी रखने की अपील की ताकि फिलिस्तीनी लोगों को न्याय जमीन और आजादी का अधिकार मिल सके।

राष्ट्रपति मादुरो ने अपने भाषण के दूसरे हिस्से में कहा कि अमेरिका की तरफ से वेनेजुएला पर हालिया हमले असल में एक मनोवैज्ञानिक युद्ध थे जिसका मकसद देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अगस्त सितंबर और अक्टूबर की शुरुआत में वाशिंगटन ने सैन्य धमकियों और मीडिया प्रचार के जरिए वेनेजुएला पर दबाव डाला, लेकिन सरकार ने इन सभी साजिशों का सफलतापूर्वक सामना किया और एक नई आर्थिक नीति अपनाते हुए उत्पादन और रोजगार के अवसरों को बनाए रखा।

अमेरिकी आरोपों के जवाब में मादुरो ने कहा:वेनेजुएला न नशीली दवाएं पैदा करता है और न ही उसका व्यापारी है।

उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह झूठे और गंभीर आरोप लगाकर वेनेजुएला को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है, खास तौर पर इस वक्त जब वह देश पर हथियारों के बहाने से हमला करने में नाकाम हो चुका है।

 

हौज़ा और यूनिवर्सिटी के मशहूर शिक्षक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अली रज़ा पनाहियान ने कहा है कि धर्म इंसान को सिर्फ आज्ञापालक नहीं बनाता बल्कि उसे अक्ल, समझ और सही पहचान करने की क्षमता प्रदान करता है ताकि वह अच्छाई और बुराई में अंतर कर सके।

विस्तार से जानकारी देते हुए हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन पनाहियान ने तेहरान में प्रसारित होने वाले कार्यक्रम "सम्त ए ख़ुदा" में बात करते हुए कहा कि इंसान का दिल आसानी से नहीं बदलता, इसलिए जरूरी है कि इंसान अपनी रुझानों और इच्छाओं को पहचाने और उनका सही प्रबंधन करे। अगर इंसान अपनी इच्छाओं को "गनीमत" समझने लगे तो यही सोच उसे गलतियों गुनाहों और अफसोस की तरफ ले जाती है।

उन्होंने इमाम सादिक अलैहिस्सलाम की हदीस ازالة الجبال اهون من إزالة قلب का हवाला देते हुए कहा कि इंसान के दिल का रुख बदलना पहाड़ को हिलाने से भी ज्यादा मुश्किल है। इसलिए जरूरी है कि हम अपनी इच्छाओं को काबू में रखना सीखें।

हौज़ा और यूनिवर्सिटी के शिक्षक ने कहा कि ज्यादातर इंसान गुनाह इसलिए करते हैं क्योंकि वह कुछ मौकों या रिश्तों को "गनीमत" समझ लेते हैं, जबकि असल में वह उनके लिए नुकसानदेह साबित होता हैं। अगर इंसान सोचे कि "क्या यह मौका वास्तव में गनीमत है? तो वह कई गलत फैसलों से बच सकता है।

उन्होंने कहा कि धर्म सिर्फ आदेशों पर अमल करने का नाम नहीं है, बल्कि धर्म इंसान को अंतर्दृष्टि, जागरूकता और सही फैसला करने की ताकत देता है। खुदा हर मौके पर स्पष्ट आदेश नहीं देता बल्कि इंसान को सोच-विचार और पहचान करने का मौका मुहैया कराता है ताकि वह अक्ल और विवेक के जरिए सही रास्ते का चयन करे।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन पनाहियान ने आगे कहा,दीन इंसान को सिर्फ आज्ञाकारी नहीं बल्कि अंतर्दृष्टि संपन्न, जागरूक और निर्णय लेने वाला बनाना चाहता है। यह धारणा गलत है कि धर्म इंसान को सिर्फ आदेश मानने वाला चाहता है असल में धर्म का लक्ष्य ऐसे Individuals तैयार करना है जो मौके और जगह की पहचान रखते हों और अच्छाई के रास्ते को खुद तलाश करें।

उन्होंने अंत में हज़रत पैगंबर मोहम्मद स.ल.व. और इमाम मोहम्मद बाकिर अलैहिस्सलाम की हदीसें बयान करते हुए कहा कि भलाई के किसी भी मौके को खोना नहीं चाहिए, क्योंकि देरी शैतान को मौका देती है। "जो व्यक्ति भलाई के किसी दरवाजे को खुला देखे उसे तुरंत उससे फायदा उठाना चाहिए क्योंकि यह नहीं पता कि वह मौका दोबारा कब नसीब होगा।

 

गज़्जा में विनाशकारी इजरायली बमबारी के बाद गाजा के पुनर्निर्माण के लिए कतरी समिति ने मंगलवार सुबह से मलबा हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है इस कार्रवाई में गाजा नगरपालिका भी शामिल है जबकि अधिकारियों के अनुसार शहर की 90% सड़कें पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट हो चुकी हैं।

गज़्जा के पुनर्निर्माण के लिए कतर समिति ने घोषणा की है कि मंगलवार सुबह से गाजा की गलियों और चौराहों से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया है।समिति के अनुसार, यह कार्रवाई नगरपालिका गज़्जा के सहयोग से की जा रही है।

गाजा नगरपालिका के प्रवक्ता ने अल जज़ीरा लाइव को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि इजरायली हमलों के परिणामस्वरूप 90% सड़कें पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट हो गई हैं, और 55 मिलियन टन मलबा शहर में जमा हो गया है। उन्होंने कहा कि मलबा हटाने और पुनर्निर्माण कार्य की शुरुआत, मुख्य राजमार्गों की बहाली के बिना संभव नहीं है।

फिलिस्तीनी समाचार एजेंसी "शहाब" के अनुसार, हाल के युद्ध में 3 लाख आवासीय इकाइयाँ पूरी तरह और 2 लाख आंशिक रूप से नष्ट हुईं, जिसके परिणामस्वरूप लाखों परिवार बेघर हो गए हैं।

इसके अलावा, 38 में से 25 अस्पताल निष्क्रिय हो गए, 95% शैक्षणिक संस्थानों को गंभीर क्षति हुई और 85% जल आपूर्ति प्रणाली नष्ट हो गई है।

इंजीनियरिंग संस्थानों और संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार, गाज़ा के पूर्ण पुनर्निर्माण में लगभग 53 बिलियन डॉलर की लागत आएगी।

दूसरी ओर, कतर के विदेश मंत्री के प्रवक्ता माजिद अलअन्सारी ने कहा कि शेखों की बैठक के परिणाम उम्मीद बढ़ाने वाले हैं और यह क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उनके अनुसार, अब गाजा की सुरक्षा, प्रबंधन और भविष्य में किसी युद्ध को रोकने के लिए वार्ता का एक नया चरण शुरू हो गया है।

कतर के अमीर शेख़ तमीम बिन हमद अल सानी ने भी बैठक के परिणामों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि हमें उम्मीद है कि अलशेख सम्मेलन फिलिस्तीन मुद्दे के व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी समाधान की दिशा में प्रगति साबित होगा।

 

एसएनएन चैनल ने एक ऑनलाइन अंतरधार्मिक "अज़मत-ए-मुस्तफा (स)" सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें विभिन्न धर्मों के विद्वानों और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया और पवित्र पैगंबर (PBUH) के दया, शांति और मानवता के सार्वभौमिक संदेश को श्रद्धांजलि दी और वर्तमान युग में प्रेम, सहिष्णुता और आपसी सम्मान को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

एसएनएन चैनल द्वारा ज़ूम के माध्यम से मौलाना असलम रिज़वी की अध्यक्षता में एक सर्वधर्म सम्मेलन "अज़मते मुस्तफ़ा" का आयोजन किया गया।

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए, पुणे शहर के मशहूर धर्मगुरु मौलाना असलम रिज़वी ने पैगंबरे इस्लाम (सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही  वसल्लम) की महानता का वर्णन करते हुए कहा कि यदि हमारे पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही वसल्लम) केवल दुनिया के लिए ही पैगंबर होते, तो आयत इस प्रकार होती: "ऐ मेरे हबीब, हमने आपको दुनिया के लिए रहमत बनाकर भेजा है।" बल्कि, दुनिया के स्थान पर "आलमीन" शब्द का प्रयोग किया गया है, जो इस बात का संकेत है कि उनकी नबूवत और मिशन को कहकशाओं, ग्रहों और तारों तक सीमित नहीं किया जा सकता। इसलिए, यह कहा जा सकता है कि जहाँ भी अल्लाह की प्रभुता है, वहाँ पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही वसल्लम ) की नबूवत और रहमत है।

मौलाना असलम रिज़वी के बाद श्रीमती ज़ीनत शौकत अली ने पैग़म्बरे इस्लाम (सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही वसल्लम ) की खूबियों को बयान करते हुए कहा कि हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (सल्लल्लाहु अलैहि व  आलेही वसल्लम ) ने पूरी मानवता को संबोधित करते हुए कहा था कि नफ़रत कभी जीत नहीं सकती। सभी को यह जानना चाहिए कि इस्लाम का आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं है और जो लोग आतंकवादी हैं वे कभी मुसलमान नहीं हो सकते।

नेपाल के प्रसिद्ध हिंदू धर्मगुरु श्री स्वामी विश्वासानंद ने पैगम्बरे इस्लाम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मैं नेपाल से सभी भारतीयों से शांति की अपील करता हूँ। आज मुसलमानों के साथ जिस तरह का दुर्व्यवहार हो रहा है, उससे मैं बहुत दुखी हूँ। इस्लाम हमेशा शांति और अमन की बात करता है और पैग़म्बरे इस्लाम शांति के दूत हैं।

अहले सुन्नत वल जमात के महान विद्वान हज़रत मुफ़्ती अब्दुल बासित ने अपने अद्भुत भाषण में कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम (सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही वसल्लम ) से प्रेम ईमान का एक हिस्सा है और ब्रह्मांड में उनके जैसा कोई नहीं है। ब्रह्मांड में आपकी उत्कृष्टता ऐसी है कि हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और अन्य धर्मों के पेशवाओं ने आपकी शान में क़सीदे पढ़े हैं  और आपके सम्मान में विभिन्न पुस्तकें लिखी हैं। आज, हम इस पवित्र पैगंबर के संबंध में देश में जो कुछ हो रहा है, उसकी निंदा करते हैं।

भिवंडी से इत्तेहाद बैनल मज़ाहिब व मसालिक के  संयोजक श्री बदीउज़-ज़माॅ ने अपने उपयोगी और सार्थक भाषण में कहा कि आज फिलिस्तीन में मानव इतिहास के सबसे बड़े नरसंहार की निंदा हर धर्म के अनुयायियों द्वारा की जा रही है, जो दर्शाता है कि मानवता अभी भी जीवित है। श्री बदीउज़-ज़मॉ ने कहा कि हमारे पवित्र पैगंबर (अल्लाह की शांति और आशीर्वाद उन पर हो) ने अंधेरे में इस्लाम का दीपक इस तरह जलाया कि चौदह सौ साल बाद भी दुनिया के बुद्धिजीवी आपको  सम्मान की दृष्टि से देख रहे हैं।

सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त, प्रखर वक्ता एवं सुप्रसिद्ध व्यक्तित्व मौलाना अली असग़र हैदरी ने अपने ओजस्वी भाषण में पवित्र पैगंबर (स.) के बेदाग़ व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर खू़बसूरती से प्रकाश डाला और मानवता की दुनिया को संबोधित करते हुए कहा कि आज कुछ लोग हमारे प्यारे वतन में नफ़रत की बारूदी सुरंगे बिछा रहे हैं, जो प्यारे वतन के लिए सही नहीं है, इसलिए जरूरी है कि अब मुहम्मद मुस्तफा (स.) के चाहने वाले इस संबंध में प्रेम का संदेश  दें और नफ़रत के सौदागरों की साजि़शों को नाकाम करें। दुनिया के सभी जागरूक लोगों को यह समझना चाहिए कि हमारे लिए आदर्श मुग़ल बादशाह नहीं बल्कि हजरत मुहम्मद मुस्तफा़ (स.) हैं।

श्री फ़िरोज़ मीठी बोरवाला ने अपने साहसिक भाषण में कहा कि यदि हमारे वतन के भाई आई लव मोहम्मद के मुकाबले में आई लव महादेव कहते हैं तो यह हमारे लिए बहुत खु़शी की बात है आज ज़रूरत है कि हिंदू और मुसलमान आपस में बातचीत करते रहें ताकि उनके बीच प्रेम और स्नेह बढ़े और नफ़रत फैलाने वाले तत्व अपनी घिनौनी साज़िश में नाकाम हो जाएँ।

श्रेष्ठ कवि और हुसैनी ब्राह्मण, श्री पंडित सागर त्रिपाठी ने सभी मुसलमानों से एक महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय अनुरोध किया कि  केवल "आई लव मुहम्मद" ना कहा जाए या लिखा जाए, बल्कि मुहम्मद के आगे "हज़रत" शब्द भी जोड़ा जाए क्योंकि सरकारे दोआलम वह महान हस्ती हैं जिन्हें उनकी उपाधि से याद किया जाना चाहिए।

इस महान कवि और लेखक नेअपने इन दो अशआर के माध्यम से पवित्र पैगंबर के दरबार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और हमें बताया कि पवित्र पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही वसल्लम ) न केवल मुसलमानों के नेता हैं, बल्कि हर इंसान उनके पवित्र दरबार के सामने विनम्र है।

पंडित त्रिपाठी के दो शेर इस प्रकार है

रोशनी के अमीन हैं आका़ । रुए माहे मोबीन हैं आक़ा ।  

सिर्फ़ एक कौ़म  के नहीं हैं वह । रहमते  आलमीन हैं आक़ा

प्रसिद्ध वक्ता और प्रख्यात धार्मिक विद्वान मौलाना अकी़ल तुराबी ने अपने गुणवत्तापूर्ण प्रबंधन से इस यादगार सम्मेलन को सफ़ल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पैनल में उपस्थित सभी विद्वानों और बुद्धिजीवियों का आभार व्यक्त किया।

एस एन एन चैनल के प्रधान संपादक मौलाना अली अब्बास वफ़ा ने पूरी मेहनत और लगन से इस कार्यक्रम का आयोजन और संकलन किया और इस सम्मेलन को एस एन एन चैनल के माध्यम से यूट्यूब पर लाइव प्रस्तुत किया, जिसे भारत सहित दुनिया के विभिन्न देशों में देखा गया।