नाइजीरिया की इस्लामी आंदोलन के नेता शेख इब्राहीम ज़कज़ाकी की राजधानी अबुजा में नीमा-ए-शाबान और हज़रत इमाम महदी (अ) के जन्मदिन के मौके पर एक भव्य सभा का आयोजन किया गया, जिसमें आम लोगों के विभिन्न वर्गों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
नाइजीरिया की इस्लामी आंदोलन के नेता शेख़ इब्राहीम ज़कज़ाकी की अगुआई में राजधानी अबुजा में निमा-ए-शाबान और हज़रत इमाम महदी (अ) के जन्मदिन के मौके पर एक भव्य सभा का आयोजन किया गया, जिसमें आम लोगों के विभिन्न वर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
इस मौके पर शेख इब्राहीम ज़कज़ाकी ने इमाम जमाना (अ) के जन्मदिन की बधाई देते हुए आप (अ) को "दुनिया के मज़लूमों का हामी" करार दिया और कहा कि हज़रत इमाम महदी (अ) आज भी उम्मत-ए-मुस्लिमा की रहनुमाई और मामलात की सरपरस्ती फरमा रहे हैं।
उन्होंने असली इंतज़ार के मायने को रौशन करते हुए कहा कि हम सिर्फ ज़ुहूर के बाद इमाम (अ) की पैरवी के मुंतज़िर नहीं, बल्कि हम इस वक़्त भी उनके ताबे हैं। इमाम महदी (अ) हमारे रहबर हैं और हमारी रहनुमाई फरमा रहे हैं।
शेख़ ज़कज़की ने कहा कि आज दुनिया साफ तौर पर दो विरोधाभासी रास्तों, हक़ और बातिल, में तक्सीम हो चुकी है। हालांकि यह तक्सीम हमेशा से मौजूद रही है, लेकिन मौजूदा दौर में यह पहले से कहीं ज़्यादा नुमायाँ हो चुकी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब हक़ व बातिल की सफें मुकम्मल तौर पर अलग हो जाएंगी तो पाखंडी किस तरफ जाएंगे? और ख़ुद ही जवाब दिया कि वह बिला शक्क व शुबहा बातिल के कैंप का रुख करेंगे।
आंदोलन के नेता ने हिदायत और गुमराही की ताक़तों के दरमियान ना-गुज़ीर तसादुम की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यह टकराव ज़रूर होगा और इससे बचने की कोई सूरत नहीं। उन्होंने मज़ीद कहा कि दुश्मन आज ख़ुद को ताक़तवर ज़ाहिर करता है, लेकिन अल्लाह के इज्न से उसे यह एहसास दिलाया जा चुका है कि इससे बढ़कर भी एक ताक़त मौजूद है, और यही अंजाम-ए-बद की अलामत है।
शेख ज़कज़की ने ख़ास तौर पर इस्लामी जम्हूरीयत-ए-ईरान में होने वाली साइंसी और टेक्नोलॉजी की तरक़्क़ी को, जो ख़ुदा के नाम और इलाही रास्ते में हासिल हो रही है, इमाम जमाना (अ) की तालीमात और हिदायत का मज़हर करार दिया।
उन्होंने इमामत और इलाही क़ियादत पर ज़ोर देते हुए कहा कि अल्लाह तआला कभी भी ज़मीन को अपने हुज्जत के बग़ैर नहीं छोड़ता।
उन्होंने एक बार फिर इस बात पर ताकीद की कि इमाम महदी (अ) उम्मत-ए-मुस्लिमा के असली इमाम हैं और उम्मीद ज़ाहिर की कि उनका ज़ुहूर जल्द वाक़े होगा।
शेख ज़कज़ाकी ने मौजूदा आलमी हालात को हिदायत और गुमराही की खुली कशमकश करार देते हुए कहा कि ज़ालिम हुक्मरां दीनी लोगों पर दबाव डाल रहे हैं और उन्हें धमकियां दे रहे हैं, लेकिन यह धमकियां बे-असर हैं, क्योंकि वअदा-ए-इलाही कभी खिलाफ-ए-वाके नहीं होता।
तकरीब के इख़तिताम पर उन्होंने ज़ुहूर-ए-इमाम अस्र (अ) में तअज्जील के लिए दुआ की और अल्लाह तआला से इल्तिजा की कि मोमिनीन को इमाम महदी (अ) के सच्चे यार व मददगारों में शामिल फरमाए।













