ईरानी इस्लामी क्रांति की जीत की सालगिरह के मौके पर यौमुल्लाह 22 बहमन के उपलक्ष्य में पूरे देश में शानदार रैलियां निकाली गईं। ज़मीनी आकलन के मुताबिक ईरान के 1,400 शहरों, कस्बों और जिलों में आयोजित इन रैलियों में करीब 2.6 करोड़ लोग शामिल हुए।
इस्लामी क्रांति की सालगिरह पर 22 बहमन के मौके पर पूरे देश में भव्य रैलियां निकाली गईं। ज़मीनी अनुमानों के मुताबिक ईरान के 1,400 शहरों, जिलों और कस्बों में हुई इन रैलियों में कुल मिलाकर लगभग 2.6 करोड़ लोगों ने हिस्सा लिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कुल भागीदारी 2.3 से 2.6 करोड़ के बीच रही, जबकि ये आंकड़े देश के करीब 40 हज़ार गांवों में आयोजित कार्यक्रमों को शामिल किए बिना हैं। ग्रामीण आबादी को शामिल न करने के बावजूद लोगों की भागीदारी करोड़ों तक पहुंच गई, जो इस्लामी क्रांति से जुड़ाव और राष्ट्रीय एकता का साफ संकेत है।
राजधानी तेहरान में लोगों की भागीदारी 38 लाख से 42 लाख के बीच बताई गई है। मुख्य सड़कों और बड़े चौराहों पर लोगों का जबरदस्त हुजूम देखने को मिला और शहर के अलग-अलग इलाकों में लोग सुबह से ही रैलियों में शामिल होते रहे।
दूसरे प्रांतों में भी भरपूर जोश-खरोश देखने को मिला। अंदाज़ों के मुताबिक विभिन्न शहरों में 1.9 से 2.2 करोड़ लोग शामिल हुए। कई जगहों पर पिछले सालों के मुकाबले ज्यादा भीड़ रिकॉर्ड की गई।
क़ुम में हज़रत फ़ातेमा मासूमा स.ल. के हरम की तरफ जाने वाले चारों रास्ते लोगों से भरे रहे। जेहाद चौक, मुतह्हरी चौक, शोहदा एवेन्यू और आज़र के आसपास असाधारण भीड़ देखने को मिली।
इस्फहान में इमाम खुमैनी चौक के अलावा हाफ़िज़ एवेन्यू और सिपाह भी पूरी तरह से खचाखच भरा रहा। इमाम हुसैन चौक और उससे जुड़ी सड़कों पर इतनी भीड़ थी कि बहुत से लोग केंद्रीय स्थल तक नहीं पहुंच पाए। शुरुआती अनुमान के मुताबिक इस्फहान में लगभग चार लाख लोग शामिल हुए।
इसी तरह मशहद, ईलाम, हमदान, यासूज, अहवाज़, तबरेज़, उरूमिया और खुर्रमाबाद समेत दूसरे शहरों में भी लोगों की बड़ी तादाद सड़कों पर नज़र आई। जानकारों के मुताबिक 22 बहमन की ये रैलियां आम लोगों के एकजुट होने, डटे रहने और इस्लामी क्रांति के प्रति वफादारी का भरपूर सबूत बनीं।













