ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि ट्रंप बार-बार कहता है कि हमारी सेना दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है। लेकिन दुनिया की सबसे ताकतवर सेना को भी कभी-कभी इतना भारी नुकसान हो सकता है कि वो दोबारा उभर ही न पाए। वे बार-बार कहता है कि हमने ईरान की तरफ युद्धपोत भेजे हैं। ठीक है, युद्धपोत खतरनाक है, लेकिन उससे भी ज्यादा खतरनाक वो हथियार है जो इस युद्धपोत को समुद्र की गहराई में पहुंचा सकता है।
आयतुल्लाह खामेनेई ने तबरेज के लोगों के ऐतिहासिक आंदोलन की सालगिरह पर उन्हें संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में एक बयान में कहा कि पिछले 47 सालों में अमेरिका ईरान की इस्लामी व्यवस्था को खत्म करने में नाकाम रहा है और ये उसने शिकायत के तौर पर अपने लोगों के सामने कहा। 47 साल हो गए, अमेरिका इस्लामी क्रांति को खत्म नहीं कर सका। ये एक अच्छी बात है। मैं कहता हूं कि आगे भी तुम ये काम नहीं कर पाओगे।
उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं में कई लोग मारे गए। इन मृतकों को तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
पहली श्रेणी वो लोग हैं जो देश की सुरक्षा और व्यवस्था की रक्षा के लिए काम कर रहे थे, जिनमें पुलिस, बसीज (स्वयंसेवक बल), सेना के कर्मचारी और उनके साथ चलने वाले लोग शामिल हैं। ये सब अपने फर्ज को निभाते हुए शहीद हुए और सबसे अच्छे शहीदों में गिने जाते हैं।
दूसरी श्रेणी आम नागरिक हैं जो रास्ते से गुजर रहे थे और दुश्मन की साजिश के नतीजे में मारे गए। उनका उपद्रवियों से कोई लेना-देना नहीं था। उन्हें भी शहीद माना जाना चाहिए।
तीसरी श्रेणी वो लोग हैं जो धोखा खाकर या अनुभवहीनता की वजह से उपद्रवी तत्वों के साथ शामिल हो गए। ये लोग भी हमारी कौम का हिस्सा हैं। उनमें से कई बाद में पछताए और माफी मांगी। उनमें से जो मारे गए, उन्हें भी शहीद माना गया और ये फैसला सही था।
आयतुल्लाह खामेनेई ने साफ किया कि सिर्फ वो लोग जिन्होंने दुश्मन से मदद ली, हथियार या पैसे लिए, या दंगे के सरगना थे, उन्हें इस दायरे में शामिल नहीं किया गया। बाकी सभी लोग चाहे वो सुरक्षाकर्मी हों, राहगीर हों या थोड़े वक्त के लिए फितने में शामिल हुए हों, ये सब हमारी संतान हैं। हम उनके लिए दुआ करते हैं, अल्लाह उनके कुसूर माफ करे और उन पर रहम करे।













