पहली रमज़ानुल मुबारक को आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनई की मौजूदगी में महफ़िल ए क़ुरआनी का इनइक़ाद

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पहली रमज़ानुल मुबारक को आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनई की मौजूदगी में महफ़िल ए क़ुरआनी का इनइक़ाद

माह-ए-मुबारक रमज़ान के पहले रोज़ रहबर-ए-इंक़िलाब-ए-इस्लामी आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनई की मौजूदगी में एक रूहानी महफ़िल-ए-क़ुरआनी का इनइक़ाद हुआ, जिसमें मुमताज़ और बैनुल-अक़वामी क़ारियों और उस्तादों ने शिरकत की।

माह ए मुबारक रमज़ान के पहले दिन रहबर-ए-इंक़िलाब-ए-इस्लामी की मौजूदगी में यह पुरनूर महफ़िल आयोजित की गई, जिसमें मुल्क-ए-ईरान के नामवर और आलमी शोहरत याफ़्ता क़ुर्रा-ए-किराम ने तिलावत-ए-क़ुरआन-ए-मजीद की दिलनशीं सदा पेश की।

यह रूहपरवर तक़रीब आज अस्र के वक़्त हुसैनिया इमाम ख़ुमैनी में मुनअक़िद हुई, जहाँ क़ुरआन-ए-हकीम की ख़ुशनुमा और असरअंगेज़ तिलावतों ने फ़िज़ा को इमानी कैफ़ियत से मुनव्वर कर दिया।

तक़रीब से ख़िताब करते हुए रहबर ए इंक़िलाब-ए-इस्लामी ने पेश की गई तिलावतों के आला मियार को सराहा और क़ारियान-ए-किराम की जिद्दो-जहद पर शुक्रिया और क़द्रदानी का इज़हार किया।आपने क़ुरआन-ए-करीम से तमस्सुक को मुआशरे की मआनवी तरक़्क़ी और फ़िक्री बुलंदी का अहम ज़रिया क़रार दिया।

यह महफ़िल हर साल माह-ए-रमज़ान के आग़ाज़ पर मुनअक़िद की जाती है, जिसमें क़ुरआनी फ़िज़ा को फ़रोग़ देने और नौजवान नस्ल को क़ुरआन से क़रीब करने पर ख़ुसूसी तवज्जोह दी जाती है।

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