भारत के धार्मिक और शैक्षणिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। मरहूम मौलाना अकील रज़ा तराबी लंबे समय से धार्मिक, प्रचारात्मक और शैक्षणिक सेवाओं के साथ-साथ लेखन के क्षेत्र में भी सक्रिय थे।
प्रसिद्ध धर्मगुरु, लेखक और मदरसा बिन्तुल हुदा रजिस्टर्ड, सैयद छपरा, जिला करनाल, हरियाणा के प्रमुख मौलाना अकील रज़ा तराबी के निधन की खबर से धार्मिक और शैक्षणिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। मरहूम लंबे समय से धार्मिक, शैक्षणिक और प्रचारात्मक सेवाओं में लगे हुए थे। इसके साथ ही वे अपनी लेखनी के माध्यम से धार्मिक और वैचारिक विषयों पर भी लगातार विचार व्यक्त करते रहे।
मौलाना अकील रज़ा तराबी का शुमार उन विद्वानों में होता था, जो शिक्षण और धार्मिक प्रचार की गतिविधियों के साथ-साथ लेखन के क्षेत्र में भी सक्रिय थे। वे धार्मिक विषयों पर लेख और शोधपरक आलेख लिखते थे। उनके लेखों में विशेष रूप से अहलेबैत (अ.) की जीवनी, मासूम इमामों (अ.) के जन्म और शहादत के अवसरों तथा उनकी शिक्षाओं के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला जाता था। उनके कई लेख और धार्मिक गतिविधियों से संबंधित समाचार हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के उर्दू विभाग में भी प्रकाशित होते रहे हैं।
मरहूम मदरसा बिन्तुल हुदा रजिस्टर्ड, सैयद छपरा, जिला करनाल के प्रमुख के रूप में धार्मिक और शैक्षणिक सेवाएं दे रहे थे। उनकी निष्ठापूर्ण कोशिशों और निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप क्षेत्र की बच्चियों की शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र स्थापित हुआ, जहां छात्राएं कुरआन मजीद, अहलेबैत (अ.) की शिक्षाओं और अन्य धार्मिक विषयों की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।
वे मदरसे की शैक्षणिक और प्रशिक्षण व्यवस्था को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे। धार्मिक शिक्षा के प्रसार, नई पीढ़ी के प्रशिक्षण और धार्मिक चेतना जागृत करने को वे अपनी जिम्मेदारी समझते थे। उनकी लेखन संबंधी सेवाओं के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में उनके प्रयास भी उल्लेखनीय हैं।
दफन की जानकारी
मरहूम के परिजनों की ओर से जारी सूचना के अनुसार, मौलाना अकील रज़ा तराबी को कल सुबह 9 बजे गढ़ी भजेरा, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
हौज़ा न्यूज़ एजेंसी मौलाना अकील रज़ा तराबी के निधन पर उनके परिजनों, संबंधियों, शिष्यों और सभी शोकाकुल लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती है। साथ ही बारगाहे इलाही में दुआ करती है कि अल्लाह तआला मरहूम की मगफिरत फरमाए, उन्हें मुहम्मद (स.) और आले मुहम्मद (अ.) के पड़ोस में उच्च स्थान प्रदान करे तथा उनके परिजनों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।













